बर्न : स्विटरलैंड के बैंकों में स्थित जिन खातों में दुनिया भर के लोगों ने अपना काला धन जमा कर रखा है, उनकी जानकारी सार्वजनिक होने की उम्मीद फिलहाल टूट गई है। स्विट्जरलैंड की संसद में बैंकिंग गोपनीयता संबंधी नियमों में ढील देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया। आरोप है कि काले धन से लाभ उठाने वाले बैंकों के हितों की रक्षा करने के लिए स्विस राजनेता लामबंद हो गए। संयुक्त राष्ट्र और पारदर्शिता के लिए अभियान चलाने वाले संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि गोपनीयता नियमों को जारी रखने का मतलब प्रेस की आजादी को नुकसान पहुंचाना है। स्विटरलैंड के कानून की धारा 47 के तहत किसी बैंक ग्राहक के बारे में सूचना को सार्वजनिक करना अपराध है। ये सूचना तब भी जारी नहीं की जा सकती, अगर ऐसा करना जन हित में समझा जाता हो। इस धारा के तहत उन ह्विसलब्लोअर्स और पत्रकारों पर मुकदमा चलाया जा सकता है, जो ऐसी सूचनाएं सामने लाते हैं। कानून की इसी धारा को रद्द करने का प्रस्ताव अर्थव्यवस्था एवं टैक्स से संबंधित स्विट्जरलैंड की संसदीय उप-समिति में लाया गया था। लेकिन वह पास नहीं हो सका। उप-समिति ने कहा है कि स्विस बैंक पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों को नियंत्रित करने के कदम उठा चुके हैँ। वे अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के मुताबिक काम कर रहे हैं। इसलिए धारा 47 को रद्द करने की जरूरत नहीं है। उप समिति ने कहा कि बैंकिंग ऐक्ट में किसी संशोधन से लोगों में खाताधारी व्यक्तियों के प्रति पूर्वाग्रह बढ़ेगा। साथ ही उप समिति ने कहा कि अभी तक खबर छापने के लिए किसी मीडिया घराने पर मुकदमा नहीं किया गया है। इसलिए मीडिया स्वतंत्रता में दखल की बात बेमतलब है। कुछ समय पहले क्रेडिट सुइसे बैंक से संबंधित एक जांच रिपोर्ट आई थी। उसके बाद स्विस बैंकिंग कानून में बदलाव की मांग दुनिया भर से उठी थी। उसी के बाद संसदीय उप समिति को बैंकिंग कानून की समीक्षा का काम सौंपा गया। गौरतलब है कि एक मीडिया रिपोर्ट में क्रेटिड सुइसे बैंक में खाता रखने वाले लगभग 30 हजार व्यक्तियों से संबंधित जानकारी का खुलासा हुआ था। उससे पता चला था कि मादक पदार्थों के कारोबार, मनी लॉन्ड्रिंग, भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल लोगों ने दशकों से इस बैंक में अपना खाता रखा हुआ है। स्विट्जरलैंड में बैंकिंग गोपनीयता के सख्त कानून हैं। पर्यवेक्षकों के मुताबिक संसदीय उप समिति ने भले कहा हो कि इन कानूनों के उल्लंघन के लिए अभी तक किसी पत्रकार के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया गया है, लेकिन ऐसा मुकदमा चलाने के कानूनी प्रावधान वहां हैं।