नई दिल्ली/भुवनेश्वर: बंगाल की खाड़ी में रविवार को दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के ऊपर बना गहरा दबाव वाला क्षेत्र बीते छह घंटों के दौरान 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ चक्रवाती तूफान ‘असानी’ में बदलकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की दिशा में बढ़ गया। दबाव क्षेत्र सुबह करीब 5.30 बजे बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में कार निकोबार (निकोबार द्वीप समूह) से करीब 450 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर पश्चिम, पोर्ट ब्लेयर से 380 किलोमीटर पश्चिम, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) से 970 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व और पुरी (ओडिशा) से 1030 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित था। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा, ‘‘चक्रवात के उत्तर-पश्चिम की तरफ बढऩे और अगले 24 घंटों के दौरान पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की आशंका है।’’ मौसम विभाग ने कहा कि चक्रवाती तूफान के 10 मई तक उत्तर-पश्चिम   की दिशा में और बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र से सटे उत्तर आंध्र प्रदेश एवं ओडिशा के तटों की ओर बढऩे के आसार हैं। इसके बाद, यह उत्तर-उत्तर पूर्वी दिशा की तरफ मुडक़र बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में ओडिशा तट की ओर बढ़ सकता है। आईएमडी के महानिदेशक (डीजी) मृत्युंजय मोहपात्रा ने शनिवार को स्पष्ट किया था कि चक्रवात के ओडिशा या आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्रों से टकराने की आशंका नहीं है, लेकिन यह समुद्र में तटीय क्षेत्र के समानांतर गमन करेगा। मौसम विभाग ने कहा कि चक्रवात के तटीय क्षेत्र से टकराए बिना अगले हफ्ते तक कमजोर पडऩे की संभावना है। विभाग के मुताबिक, चक्रवात के प्रभाव से उत्तरी आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों पर मंगलवार से तेज हवाएं चलने और बारिश होने की आशंका है। विभाग ने बताया कि चक्रवाती तूफान का नाम ‘असानी’ रखा गया है, जो ‘क्रोध’ के लिए इस्तेमाल सिंहली भाषा का शब्द है। आईएमडी ने रविवार सुबह 8.30 बजे जारी बुलेटिन में कहा, ‘‘अगले 24 घंटों के दौरान तूफान के उत्तर-पश्चिम की तरफ बढऩे और पूर्वी मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक गंभीर चक्रवाती तूफान में परिवर्तित होकर और तेज होने की आशंका है।’’ आईएमडी द्वारा चक्रवात के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात के 10 मई की शाम तक उत्तर-पश्चिम की तरफ बढऩे और उत्तरी आंध्र प्रदेश व ओडिशा के तटों से बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य एवं उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र तक पहुंचने के आसार हैं। इसके बाद, इसके उत्तर-उत्तर-पूर्व की तरफ मुडऩे और ओडिशा तट से दूर बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र की ओर बढऩे की प्रबल संभावना है।