गुवाहाटी : इस साल की पहली बाढ़ से राज्य के छह जिले प्रभावित हैं। कछार, धेमाजी, होजाई, पश्चिम कार्बी आंग्लांग, नगांव व नलबाड़ी जिले के विभिन्न इलाके बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। ब्रह्मपुत्र और इसकी शाखा नदियों के साथ बराक नदी में जल स्तर बढऩे से संबंधित इलाकों में तबाही मचा हुआ है। पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के क   निमाती घाट  पर ब्रह्मपुत्र, कछार की अन्नपूर्णाघाट में बराक नदी व कामपुर में कपिली नदी का जल स्तर खतरे के निशान के ऊपर है। बाढ़ के कारण कछार में तीन लोगों के लापता होने की खबर है। सिलचर में एक  बच्चे के साथ अन्य दो लोग बाढ़ के पानी में बह गए है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सूत्रों के मुताबिक छह जिलों के करीब दो सौ से अधिक   गांवों के 56 हजार 6 सौ 69 लोग बाढ़ से प्रभावित है। दूसरी ओर इन जिलों की करीब दस हेक्टर कृृषि जमीन बाढ़ की चपेट में है। वहीं बरसला के धीराइमुख में धीराई नदी की बाढ़ से कई परिवार क्षतिग्रस्त हुए हैं। गोरेश्वर के बंगालीपाड़ा में देउसुंगा नदी के तटबंध टूट जाने से कई गांव जलमग्न हो चुके हैं। इसी तरह विभिन्न इलाकों में बाढ़ से तबाही जारी है।  दूसरी ओर खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण लामडिंग मंडल के लामडिंग-बदरपुर पहाड़ी खंड के कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन और जल जमावहो गया। इस गंभीर स्थिति के कारण खंड पर पू. सी. रेल ने ट्रेन सेवाओं को नियंत्रित किया। हालांकि, दो ट्रेनें फंस गईं, जिसमें प्रत्येक में लगभग 1400 यात्री थे - एक ट्रेन संख्या 15616 सिलचर-गुवाहाटी एक्सप्रेस डिटकछड़ा स्टेशन पर और दूसरी ट्रेन संख्या 15615 गुवाहाटी-सिलचर एक्सप्रेस न्यू हाफलांग स्टेशन पर। बड़े पैमाने पर भूस्खलन और जल जमाव के कारण इस पहाड़ी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक, पुलों और सडक़ मार्ग को भारी नुकसान हुआ है। रेलवे ने वायु सेना, एनडीआरएफ, असम राइफल्स और स्थानीय लोगों की मदद से बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू किया। डिटकछड़ा स्टेशन पर फंसे ट्रेन संख्या 15616 के लगभग 1245 रेल यात्रियों को बदरपुर और सिलचर लाया गया है और शेष 119 यात्रियों को भारतीय वायु सेना द्वारा एयरलिफ्ट कर सिलचर लाया गया। न्यू हाफलांग स्टेशन पर फंसे यात्रियों को बसों द्वारा माईबांग स्टेशन ले जाया जा रहा है। माईबांग स्टेशन से गुवाहाटी तक राहत ट्रेन कनेक्टिविटी प्रदान की गई है। 204 यात्री पहले ही गुवाहाटी से माईबांग के लिए रवाना हो चुके हैं। न्यू हाफलांग के शेष यात्रियों को भी माईबांग ले जाया जा रहा है, जहां एक अन्य राहत ट्रेन उनलोगों को गुवाहाटी ले जाने के लिए इंतजार कर रही है। पू. सी. रेल की रेलवे सुरक्षा बल (रे.सु.ब.) सबसे आगे रहती है। वह तुरंत हरकत में आयी और फंसे हुए यात्रियों को अपने कंधों पर उठाकर डिटकछड़ा एवं बंदरखाल के बीच क्षतिग्रस्त पुल के एक तरफ से दूसरी तरफ ले गयी। रेलवे फंसे हुए यात्रियों को बचाने के प्रयास में स्वच्छता का ध्यान रख रही है और प्रत्येक यात्री के लिए चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित कर रही है। उन्हें आहार और पेय जल भी मुहैया करायी गयी है।