हाफलांग/गुवाहाटी : पिछले सात दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण दीमा हसाओ में बाढ़ का तांडव अब तक जारी है। रविवार रात हुई भारी बारिश के कारण सोमवार तडक़े पहाड़ी माहुर नदी में आई बाढ़ ने माइबांग में काफी विध्वंस किया। सुबह लोगों के जागने से पहले ही बाढ़ के पानी का तेज धार किनारे के 17 घरों को बहाकर ले गया। इस बाढ़ में एक परिवार के 7 लोग फंस गए परंतु स्थानीय लोगों के तत्पर हो जाने के कारण वे बाल- बाल बच गए। इसके बाद माइबांग के अन्य एक जगह बाढ़ में 8 घर बह गए। घटना की खबर मिलने पर पहाड़ी इलाका विकास मंत्री जोगेन मोहन माइबांग पहुंचे और वहां स्थानीय विधायक नंदिता गार्लोसा के साथ बाढ़ के  विध्वंसक  कार्यो का निरीक्षण किया। मंत्री ने स्थानीय विधायक तथा एसडीसी पल्लव मजुमदार को बाढ़ में क्षतिग्रस्त लोगों को जितनी जल्दी हो सके क्षतिपूरण देने तथा बेघर लोगों के लिए राहत शिविर स्थापना करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि कई जगहों पर रास्ते पर हुए भूस्खलन के कारण माइबांग से हाफलांग तक यातायात व्यवस्था ठप्प हो चुकी है। मंत्री जोगेन मोहन ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा लोकनिर्माण विभाग के के इंजीनियरों को लमडिंग-हाफलांग पथ यातायात के लिए खोलने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया। बाढ़ के कारण हुए भूस्खलन के कारण हाफलांग शहर से रेलमार्ग तथा स्थलमार्ग से संयोग असंभव हो चुका है। न्यू हाफलांग स्टेशन कीचड़ से पूरा दब गया है। पहाड़ से उतरी बाढ़ के पानी और कीचड़ ने लाइन पर रुकी एक ट्रेन गिरा दिया है। गुवाहाटी-सिलचर वाले दो ट्रेन न्यू हाफलांग और विटेकसरा स्टेशन में फंसे हुए हैं। जहां प्रशासन ने कुछ यात्रियों को रेल-बस से सिलचर लौटाया वहीं डेढ़ सौ से अधिक यात्रियों को भारतीय वायुसेना के हैलीकॉप्टर से बचा लिया गया। असम राइफल्स ने भी फंसे हुए लोगों के बचाव के लिए विशेष बस सेवा की व्यवस्था की है। कई जगहों पर बाढ़ का पानी रेल लाइन के नीचे 20-30 मीटर तक खोद कर बहा ले जाने के कारण सिर्फ रेल की पटरी लटकी हुई देखी जा रही है। बाढ़ तथा भूस्खलन में क्षतिग्रस्त रेल लाइन की मरम्मत का काम खराब मौसम के कारण आगे नहीं बढ़ रहा है। दीमा हसाओ तक रेल सेवा पर अनिश्चित समय तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। बारिश न रुकी तो आगामी 24 घंटों में जिले की स्थिति और खराब होने की संभावना है।  दूसरी ओर राज्य में हो रही लगातार बारिश के कारण सिलचर-गुवाहाटी संयोग पथ में व्यापक भूस्खलन हो रहा है। पहाड़ तथा रास्ते के किनारे से पेड़, पत्थर आदि गिरने के कारण कई जगहों पर रास्ता बंद हो चुका है। रास्ते में रुके हुए ट्रकों के पहिए के ऊपर तक कीचड़ भर गया है। भूस्खलन के कारण सिलचर-गुवाहाटी संयोग पथ में यातायात बंद हो चुका है। मेघालय प्रशासन की तरफ से रास्ता खोलने की कोशिश की जा रही है परंतु अब तक कामयाबी नहीं मिली है। बराक घाटी जाने के रास्ते में सोनापुर से राताचेरा पेट्रोल पंप के बीच वाले रास्ते में करीब 10,000 लोग फंस गए थे। इनमें बराक घाटी के बरखला विस क्षेत्र की पूर्व विधायिका रुमी नाथ भी शामिल थी। अब भी इस रास्ते में अनेक लोग फंसे हुए हैं जिनमें बच्चे, महिला तथा बुजुर्ग भी शामिल हैं। रुमी नाथ ने शिकायत की कि फंसे हुए लोगों के बचाव के लिए असम सरकार कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। रुमी नाथ ने कछार के उपायुक्त को फोन करके शिकायत दर्ज की है।