लखनऊ/नई दिल्ली : कांग्रेस से 16 मई को इस्तीफा दे चुके कपिल सिब्बल ने बुधवार को उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी (सपा) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। सिब्बल के कांग्रेस छोडऩे से पार्टी को बड़ा झटका लगा है। वह तीन दशकों से कांग्रेस के साथ थे। सिब्बल ने कहा कि उनका सपना 2024 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मुकाबले के लिए  सभी विपक्षी दलों को साथ लाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सिब्बल सपा प्रमुख अखिलेश यादव, राम गोपाल यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ पर्चा दाखिल करने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा परिसर गए। कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की मांग करने वाले नेताओं के ‘जी-23’ समूह के एक प्रमुख सदस्य रहे सिब्बल का पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल चार जुलाई को समाप्त हो रहा है। लखनऊ में सिब्बल ने संवाददाताओं से कहा कि मैंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पर्चा भरा है और मैं अखिलेश जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे समर्थन दिया है। सिब्बल ने यह भी कहा कि वह 16 मई को कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं और अब वह कांग्रेस के नेता नहीं हैं। कांग्रेस से नाता तोडऩे के कारण के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा कि कांग्रेस से 31 साल तक मेरे गहरे रिश्ते रहे हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। राजीव गांधी की वजह से मैं कांग्रेस में आया था। उन्होंने कहा कि आप भी सोच रहे होंगे कि 31 साल बाद कांग्रेस से कोई चला जाएगा? तो कुछ न कुछ तो होगा। दिल पर क्या बीत रही होगी....कभी-कभी ऐसे फैसले करने पड़ते हैं। साथ ही सिब्बल ने कहा कि मेरी विचारधारा कांग्रेस से जुड़ी हुई है। मैं कांग्रेस से दूर नहीं हूं, उसकी विचारधारा से दूर नहीं हूं, मैं कांग्रेस की भावनाओं के साथ हूं। मैं चाहता हूं कि हिंदुस्तान एक समावेशी भारत बने। वकील-नेता सिब्बल ने कहा कि हम विपक्ष में रहकर एक गठबंधन बनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि 2024 में ऐसा माहौल बने कि मोदी नीत सरकार की जो खामियां हैं उन्हें जनता तक पहुंचाया जाए। सिब्बल को समर्थन देने के मुद्दे पर अखिलेश ने कहा कि कपिल सिब्बल देश के जाने-माने अधिवक्ता हैं। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा में अपनी बात को अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।