भारतीय संस्कृति में हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक हर माह के तिथि पर्व का अपना विशेष महत्व है। प्रख्यात ज्योतिषविद्  विमल जैन ने बताया कि सोमवार को पडऩे वाली अमावस्या तिथि सोमवती अमावस्या के नाम से जानी जाती है। सोमवार का दिन देवाधिदेव महादेव शिवजी का माना गया है। आज के दिन शिवपूजा भी कल्याणकारी होती है। शिवजी का रुद्राभिषेक भी आज के दिन करवाना लाभकारी माना गया है। इस बार सोमवार के दिन अमावस्या पडऩे से और अधिक शुभ फलकारी हो गई है। इस बार 30 मई, सोमवार को अमावस्या तिथि पडऩे से सोमवती अमावस्या का पर्व आज ही मनाया जाएगा।  विमल जैन ने बताया कि ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि रविवार, 29 मई को दिन में 2 बजकर 56 मिनट पर लग गई जो कि अगले दिन सोमवार, 30 मई को सायं 5 बजकर 00 मिनट तक रहेगी। इस तिथि पर स्नान-दान-व्रत करने का विशेष महत्व है।

पूजा-अर्चना का विधान : सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना से सुख-समृद्धि, खुशहाली मिलती है। अमावस्या तिथि पर विधि-विधान पूर्वक पितरों की भी पूजा-अर्चना की जाती है।  इस दिन पीपल के वृक्ष व भगवान् विष्णु जी की पूजा-अर्चना के साथ पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने पर आरोग्य व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

पीपल के वृक्ष की चमत्कारिक महिमा : पीपल वृक्ष में समस्त देवताओं का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष को जल से सिंचन करके विधि-विधान पूर्वक पूजा के पश्चात् 108 बार परिक्रमा करने पर सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस दिन व्रत उपवास रखकर इष्ट-देवी देवता एवं आराध्य देवी देवता की पूजा अर्चना अवश्य करनी चाहिए। ब्राह्मण को घर पर निमन्त्रित करके उन्हें भोजन करवाकर सफेद रंग की वस्तुओं का दान जैसे—चावल, दूध, मिश्री, चीनी, खोवे से बने सफेद मिष्ठान्न, सफेद वस्त्र, चांदी एवं अन्य सफेद रंग की वस्तुएं दक्षिणा के साथ देकर, उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेना चाहिए। 

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