नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने मंगलवार का 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में देश की जीडीपी के आंकड़े पेश कर दिए हैं। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था का ताजा हाल पेश करने वाले हैं। इसके मुताबिक, वित्तवर्ष 2021-22 में यह 8.7 फीसदी रही। इसके पहले वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 6.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च को समाप्त हुई चौथी तिमाही में जीडीपी की रफ्तार 4.1 फीसदी रही है। इससे पहले अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 5.4 फीसदी रही थी। अनुमान जताया गया था कि कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी और रूस-यूक्रेन युद्ध के लंबा खिंचने के कारण मार्च तिमाही में जीडीपी सुस्त रह  सकती है। इन दोनों कारणों का असर चौथी तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में देखने को मिला है। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों को देखें तो जनवरी-मार्च 2021 तिमाही में वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रही थी। सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 6.9 प्रतिशत के संशोधित बजट अनुमान के मुकाबले 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.71 प्रतिशत रहा है। यह संशोधित लक्ष्य से 20 बेसिस प्वाइंट (बीपीएस) से कम कर रहा है। गौरतलब है कि बजट के अनुसार, राजकोषीय घाटे को संशोधित कर 15.91 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया था। ताजा आंकड़ों को देखें तो घाटा वास्तविक वित्तीय घाटे 15.87 लाख करोड़ रुपए से 4,552 करोड़ रुपए कम है। बुनियादी क्षेत्र के आठ उद्योगों का उत्पादन में अप्रैल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक साल पहले की समान अवधि में यह 8.4 फीसदी बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे आठ बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वहीं कच्चे तेल का उत्पादन अप्रैल में 0.9 प्रतिशत घटा है, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 2.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी।