नई दिल्ली : सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 6.9 प्रतिशत के संशोधित बजट अनुमान के मुकाबले 2021-22 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 6.71 प्रतिशत रहा है। यह संशोधित लक्ष्य से 20 बेसिस प्वाइंट (बीपीएस) स कम कर रहा है। गौरतलब है कि बजट के अनुसार, राजकोषीय घाटे को संशोधित कर 15.91 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया था। ताजा आंकड़ों को देखें तो घाटा वास्तविक वित्तीय घाटे 15.87 लाख करोड़ रुपए से 4,552 करोड़ रुपए कम है। बीते फरवरी माह के बजट में सरकार ने इस अनुमान को संशोधित कर 6.9 प्रतिशत या 15,91,089 करोड़ रुपए कर दिया। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 के अंत में राजस्व घाटा 4.37 प्रतिशत रहा। बता दें कि सरकार ने हाल ही में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में आठ रुपए प्रति लीटर और डीजल पर छह रुपए प्रति लीटर की कटौती की है। इससे सरकारी खजाने पर करीब एक लाख करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। इस फैसले का असर राजकोषीय घाटे पर पडऩे की पूरी संभावना है। कहा जा रहा है कि ईंधन पर उत्पाद शुल्क घटने से देश के राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन 2022 के लिए भारत के विकास अनुमान को संशोधित करने की प्रक्रिया में है, जो वैश्विक मंदी के जोखिम के बीच इसके पहले के 8.2 प्रतिशत के अनुमान से कम हो सकता है। बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने जनवरी में अनुमानित 9 प्रतिशत की तुलना में भारत के विकास अनुमान को 8.2 प्रतिशत तक कम कर दिया था। आईएमएफ को 2023 तक, देश की जीडीपी 6.9 प्रतिशत की दर से बढऩे की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि देश उच्च मुद्रास्फीति का सामना कर रहा है, जो रोजगार के अवसरों के लिए अच्छा नहीं होगा।