गुवाहाटी : मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष मां कामाख्या धाम का अंबुवासी मेला बिना किसी समारोह के लगेगा। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि नीलाचल की पहाड़ियों में अंबुवासी पर्व सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाएगी। उन्होंने तीर्थयात्रियों से भी अंबुवासी मेले में भाग नहीं लेने का खुले तौर पर आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले राज्य के पर्यटन मंत्री जयंत मल्लबरुवा ने घोषणा की थी कि इस बार कामाख्या धाम का अंबुवासी मेला भव्य तरीके से आयोजित किया जाएगा और मेले में भाग लेने वाले 30,000 भक्तों के लिए आश्रय शिविर स्थापित किए गए हैं। पर्यटन मंत्री जयंत मल्ल बरुवा ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि अंबुबाची के अवसर पर कामाख्या धाम में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था पहले की तरह की जाएगी। अम्बुवासी के अवसर पर जो तीर्थयात्री मां कामाख्या के दर्शन के लिए आएंगे उन्हें माछखोवा में ओल्ड जेल कैंपस, कामाख्या स्टेशन, बोरीपाड़ा ग्राउंड और ओल्ड मालीगांव स्टेशन परिसर में ठहराया जाएगा। इस वर्ष स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यक सेवाओं के अलावा किसी भी निजी वाहन को पहाड़ पर चढ़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही इस बार किसी कार पास की व्यवस्था नहीं की गई है। अंबुवासी के दौरान भक्तों को मंदिर परिसर में कामाख्या की मुख्य सड़क, पांडु से कामाख्या तक की सड़क और मेखला उजोवा सड़क से पैदल जाना होगा। केवल विकलांग यात्रियों, वरिष्ठ नागरिकों और विशेष जरूरतों के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। कामाख्या की पहाड़ियों में साफ-सफाई, रोशनी और धार्मिक संगीत की विशेष व्यवस्था होगी। पर्यटन मंत्री की घोषणा के एक दिन बाद मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि कामाध्या धाम में अंबुवासी मेले के बजाए केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए तीर्थयात्रियों से अंबुबाची मेले में भाग नहीं लेने का खुले तौर पर आग्रह किया। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंबुवासी मेला उसी तरह आयोजित किया जाएगा जैसे महामारी के दौरान आयोजित किया गया था। अंबुवासी इस साल सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं लोगों से आग्रह करूंगा कि वे पहले की तरह अंबुवासी मेले में न आएं। कामाख्या मंदिर में कई भूस्खलन हो चुके हैं और अंबुवासी के दौरान बारिश हुई तो नियंत्रण सरकार के हाथ में नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अंबुबाची मेला कोई नहीं मनाता। जब मंदिर परिसर में लोग आते हैं और भीड़ लगाते हैं, तो हम इसे मेला कहते हैं। मुख्यमंत्री ने यह खुलासा किया कि अंबुवासी मेला दरअसल कोई मेला नहीं है, इसे हमारी भाषा में हाट लगाना कहा जाता है। कामाख्या मां का मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है और लोग उन दिनों में साधना करते हैं। सरकार कोई मेले नहीं लगाती है, केवल तीर्थयात्रियों के लिए आवास प्रदान करती है, अर्थात मंदिर में दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रहने खाने की व्यवस्था कर देती है। सीएम शर्मा ने कहा कि मैं तीर्थयात्रियों से आग्रह करता हूं कि इस बार अंबुवासी में न आएं। इस बार अंबुवासी उसी प्रकार मनाया जाएगा जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान मनाया गया था। कामाख्या रोड पर भूस्खलन होने की आशंका है। मुझे नहीं पता कि बारिश होने पर क्या होगा। सीएम की घोषणा के बाद कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के उपायुक्त द्वारा घोषणा की गई कि अंबुवासी मेला 22-26 जून तक बिना किसी समारोह के मनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जब देश में कोविड-19 की चौथी लहर शुरू हो गई है तब देश-विदेश के सैकड़ों-हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में अंबुवासी मेला भव्य तरीके से आयोजित किए जाने पर महामारी फैलने की आशंका बढ़ेगी। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी ने अब पड़ोसी पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विनाशकारी मोड़ ले लिया है। देश में पिछले 24 घंटे में कोविड के 13,000 नए मामले सामने आए हैं। देश में अन्य राज्यों के साथ-साथ असम में भी रोजाना 15-20 लोग कोविड से संक्रमित हो रहे हैं। डॉक्टरों ने पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में कोविड-19 के मामलों की संख्या में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की है। क्योंकि अंबुवाची मेले में भाग लेने वाले लगभग 50 प्रतिशत तीर्थयात्री पश्चिम बंगाल से आते हैं। इसलिए कोविड के प्रसार को रोकने के लिए उपाय करना आवश्यक है कि अंबुवासी मेला बिना किसी समारोह के मनाया जाए। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से कोविड-19 महामारी के आह्वान की घोषणा नहीं की, लेकिन कहा कि यह कामाख्या पहाड़ियों में हो रहे कुछ भूस्खलन की घटनाओं के कारण एहतियाती उपाय के रूप में ऐसी व्यवस्था की गई है।
बिना किसी समारोह के आयोजित होगा अंबुवासी मेला : मुख्यमंत्री