कोलंबो : गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवासों पर कब्जा कर लेने के बीच बुधवार को देश के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे सेना के एक विमान से देश छोडक़र मालदीव चले गए। राजपक्षे (73) ने मालदीव से ही प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति नियुक्त किया है। संसद अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवद्र्धन ने घोषणा की कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने अपने विदेश प्रवास के दौरान कामकाज संभालने के लिए प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को नियुक्ति किया है। उन्होंने बताया शेष पृष्ठ 11 पर क यह संविधान के अनुच्छेद 37(1) के तहत किया गया है। अभयवद्र्धन ने ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने उन्हें टेलीफोन पर सूचित किया है कि वह वादे के अनुसार आज (बुधवार) इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि नये राष्ट्रपति के लिए मतदान 20 जुलाई को होगा। कोलंबो में ‘फ्लावर स्ट्रीट’ पर विक्रमसिंघे के कार्यालय के समीप प्रदर्शनकारी एकत्रित हो गए। इसके बाद विक्रमसिंघे ने देश में आपातकाल लागू करने की घोषणा की। साथ ही पश्चिमी प्रांत में कफ्र्यू लगाया गया है। राजपक्षे के मालदीव जाने के बाद राष्ट्रपति नियुक्त किए गए विक्रमसिंघे ने विशेष टेलीविजन भाषण में कहा कि मैं आपातकाल और कफ्र्यू लागू कर रहा हूं। उन्होंने सैन्य कमांडरों और पुलिस प्रमुख को आदेश दिया है कि व्यवस्था बहाल करने के लिए जो कुछ जरूरी है, किया जाए। विक्रमसिंघे ने कहा कि सशस्त्र बलों के प्रमुखों की एक समिति को यह काम करने की जिम्मेदारी दी गई है जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप बिल्कुल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि खुफिया जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों की योजना उनके कार्यालय और संसद पर कब्जा करने की थी जिसके बाद आपातकाल लगाना पड़ा। विक्रमसिंघे ने कहा कि राष्ट्रपति के देश छोडक़र जाने और नये राष्ट्रपति के चुनाव के लिए कदम उठाये जाने के बावजूद कुछ प्रदर्शनकारी समूहों ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर कब्जे की योजना बनाई और राष्ट्रपति को मालदीव जाने के लिए वायु सेना का विमान उपलब्ध कराने पर वायु सेना के कमांडर के आवास को घेर लिया। उन्होंने नौसेना के कमांडर और सैन्य कमांडर के आवास को भी घेरने का फैसला किया। इन समूहों ने देश को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति राजपक्षे के देश छोडक़र मालदीव चले जाने की खबरें आने के बाद ‘फ्लावर स्ट्रीट’ पर विक्रमसिंघे के कार्यालय की ओर कूच करते हुए उनसे इस्तीफा देने की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेडऩे के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे लेकिन इसके बावजूद वे अवरोधकों को हटाकर प्रधानमंत्री के कार्यालय में घुस गए। देश के सरकारी टेलीविजन चैनल ‘रूपवाहिनी’ ने बुधवार को कुछ समय के लिए प्रसारण बंद कर दिया क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने इसकी इमारत पर धावा बोल दिया। हालांकि, बाद में चैनल ने प्रसारण बहाल किया। रूपवाहिनी द्वारा प्रसारण निलंबित किए जाने के कुछ देर बाद श्रीलंका के एक और सरकारी टीवी चैनल ने प्रसारण रोक दिया। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने आगाह कि सत्ता के लिए भूखा एक समूह धीरे-धीरे देश को तबाह कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और कार्यवाहक राष्ट्रपति के पास जनादेश नहीं है इसलिए उन्हें अपने निर्देशों को लागू करने से पहले गहन विचार करना चाहिए। सिरिसेना ने एक बयान में कहा कि सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी है कि वे संघर्ष कर रहे लोगों की सुरक्षा करें। नेता प्रतिपक्ष सजित प्रेमदास ने ट्वीट कर कहा कि एक सीट वाले सांसद को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। अब उसी व्यक्ति को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त गया है। यह लोकतंत्र की ‘राजपक्षे शैली’ है। क्या तमाशा है। क्या त्रासदी है। इससे पहले दिन में, श्रीलंका की वायु सेना ने एक संक्षिप्त बयान में बताया कि 73 वर्षीय राजपक्षे, अपनी पत्नी और दो सुरक्षा अधिकारियों के साथ सेना के एक विमान से देश से बाहर चले गए हैं। बयान में कहा गया है कि सरकार के अनुरोध पर और संविधान के तहत राष्ट्रपति को मिली शक्तियों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय की पूर्ण स्वीकृति के साथ राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और दो सुरक्षा अधिकारियों को 13 जुलाई को कातुनायके अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से मालदीव रवाना होने के लिए श्रीलंकाई वायु सेना का विमान उपलब्ध कराया गया। ऐसा बताया जा रहा है कि राजपक्षे नयी सरकार द्वारा गिरफ्तार किए जाने की आशंका के चलते इस्तीफा देने से पहले विदेश जाना चाहते थे। राजपक्षे ने शनिवार को घोषणा की थी कि वह बुधवार को इस्तीफा देंगे। उन्होंने गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवासों पर कब्जा जमाने के बाद यह घोषणा की थी। बीबीसी की एक खबर में कहा गया है कि वह स्थानीय समयानुसार लगभग तीन बजे तडक़े मालदीव की राजधानी माले पहुंचे। यहां सूत्रों ने मालदीव के अधिकारियों के हवाले से बताया कि गत रात वेलाना हवाई अड्डे पर मालदीव सरकार के प्रतिनिधियों ने राजपक्षे की अगवानी की। उन्हें पुलिस की सुरक्षा में अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। हालांकि, मालदीव की सरकार ने राजपक्षे के देश पहुंचने के संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। सूत्रों के अनुसार राजपक्षे के मालदीव जाने में मालदीव की संसद के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मदद की है। सूत्रों ने बताया कि मालदीव सरकार का तर्क है कि राजपक्षे अब भी श्रीलंका के राष्ट्रपति हैं और उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है या किसी उत्तराधिकारी को अपनी शक्तियां नहीं सौंपी हैं इसलिए अगर वह मालदीव आना चाहते हैं तो इससे मना नहीं किया जा सकता है। मालदीव के संसद सचिवालय के संचार निदेशक हसन जिआउ ने कहा कि संसद को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। टीवी समाचार चैनलों पर प्रसारित खबरों के अनुसार, राजपक्षे के साथ 13 लोग मालदीव गए हैं। वे एएन32 विमान से मालदीव पहुंचे। खबरों के अनुसार, मालदीव में नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने देश में किसी सैन्य विमान के उतरने के शुरुआती अनुरोधों को ठुकरा दिया था लेकिन बाद में अध्यक्ष नशीद के आग्रह पर विमान को उतरने की अनुमति दी गई। मालदीव में सूत्रों के हवाले से ‘डेली मिरर’ ने एक रिपोर्ट में कहा कि राजपक्षे सिंगापुर रवाना हो सकते हैं। राजपक्षे मालदीव से किसी अन्य देश जा सकते हैं, जिसके बारे में अभी जानकारी नहीं है। उधर, श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने बुधवार को मीडिया में आयी उन खबरों को ‘‘निराधार’’ बताया कि उसने राष्ट्रपति राजपक्षे के देश छोडक़र मालदीव जाने में मदद की है। उसने कहा कि यह दोहराया जाता है कि भारत लोकतांत्रिक माध्यमों और मूल्यों, स्थापित लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक रूपरेखा के जरिए समृद्धि एवं प्रगति की आकांक्षाओं को पूरा करने में श्रीलंका के लोगों का सहयोग करता रहेगा।