भगवान शिवजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिन्हें तैंतीस कोटि देवी-देवताओं में देवाधिदेव महादेव माना गया है। भगवान शिवजी की विशेष कृपा-प्राप्ति के लिए शिवपुराण में विविध व्रतों का उल्लेख है, जिसमें श्रावण मास के सोमवार का व्रत प्रमुख हैं। श्रावण माह के सभी सोमवार को व्रत रखा जाता है। ज्योतिषविद्  विमल जैन ने बताया कि इस बार श्रावण मास का प्रथम सोमवार 18 जुलाई को पड़ रहा है। सोमवार शिवजी का प्रिय दिन है, जिससे श्रावण मास का सोमवार व्रत के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। पार्थिव शिवलिंग स्वच्छ मिट्टी, गंगालजल से निर्माण करके विधि-विधानपूर्वक पूजा किया जाता है। श्रावण मास में शिवभक्त कांवड़ यात्रा करके उन्हें जलार्पित करते हैं।

व्रत का विधान : विमल जैन  ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रात:काल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त हो स्नानकर स्वच्छ वस्त्र धारण करके अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। तत्पश्चात् अपने दाहिने हाथ में जल, पुष्प, फल, गंध व कुश लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संपूर्ण दिन निराहार रहते हुए सायंकाल पुन: स्नान कर स्वच्छ व धारण करके पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर भगवान शिवजी की विधि-विधान पूर्वक पूजा की जाती है। भगवान शिवजी का अभिषेक करके उन्हें वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण, सुगंधित द्रव्य के साथ बेलपत्र, कनेर, धतूरा, मदार, ऋतुपुष्प, नैवेद्य आदि जो भी सुलभ हो,अर्पित करके शृंगार करना चाहिए। तत्पश्चात् धूप-दीप प्रज्वलित करके आरती करनी चाहिए। पंचोपचार, दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजा-अर्चना करनी चाहिए। धार्मिक परंपरा के अनुसार जगतजननी माता पार्वतीजी की भी पूजा-अर्चना करने का विधान है। शिवभक्त अपने मस्तक पर भस्म व तिलक लगाकर शिवजी की पूजा करें तो पूजा शीघ्र फलित होती है। 

मो. : 09335414722