गुवाहाटी : राज्य सरकार अभी भी कर्ज के बोझ तले दबी है। हैरानी की बात है कि असम सरकार का कर्ज का बोझ अब 1,00,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। लोकसभा में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस वर्ष 31 मार्च तक असम सरकार का ऋण 1,07,719 करोड़ रुपए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री की रिपोर्ट के अनुसार असम सरकार का कर्ज 2020 में 73,527 करोड़ रुपए थे। 2021 में यह कर्जे बढक़र 90,762 करोड़ रुपए हो गए। उल्लेखनीय है कि कर्ज के मामले में असम पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ऊपर है। पड़ोसी देश अरुणाचल प्रदेश पर इस साल मार्च तक 15,000 करोड़ रुपए बकाया है। इसी तरह मणिपुर को 13.51 हजार करोड़ रुपए, मेघालय को 15.12 हजार करोड़ रुपए, मिजोरम को 11. 83 हजार करोड़ रुपए और नागालैंड को 15.62 हजार करोड़ रुपए बकाया हैं। इस हिसाब से पड़ोसी राज्यों की तुलना में असम का कर्ज 1,00,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने चालू वित्त वर्ष की 21 जून में रिजर्व बैंक के माध्यम से प्रतिभूतियों की नीलामी के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपए उधार लिए। गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी मुवाबजा बंद करने के बाद राज्य सरकार के पास कर्ज लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहा। असम को भी पिछले साल के जीएसटी मुआवजे के रूप में 549 करोड़ रुपए मिलना बाकी है।