वाशिंगटन : अमरीका ने काबुल में अल कायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी को 2 मिसाइलें दाग कर मार गिराया है। हालांकि उस जगह पर धमाके का कोई निशान नहीं दिख रहा है, न ही कोई और कैजुअल्टी हुई। इसके बाद से यह चर्चा है कि अमरीका ने कौन सी मिसाइल दागी जिससे विस्फोट भी नहीं हुआ और जवाहिरी मारा भी गया। इसका जवाब है आर9एक्स हेलफायर मिसाइल, जिसे निंजा भी कहते हैं। इस मिसाइल में विस्फोटक के बजाय 6 रेजर जैसे ब्लेड लगे होते हैं जो टारगेट के टुकड़े-टुकड़े कर देता है। इसी सीक्रेट किलर मिसाइल से जवाहिरी को भी मारा गया है। बाइडन प्रशासन के एक सीनियर अफसर ने बताया कि रविवार की सुबह करीब 6.18 बजे काबुल के शेरपुर में जवाहिरी बालकनी में टहल रहा था। उस वक्त 2 आर9एक्स हेलफायर मिसाइल आईं और जवाहिरी को मार गिराया। ये मिसाइल ड्रोन से दागी गईं थीं। इस हमले में न तो कोई विस्फोट हुआ, न कोई फैमिली मेंबर मारा गया और न आस-पास की इमारतों को कोई नुकसान हुआ। दरअसल, आर9एक्स हेलफायर दुनिया की सबसे एडवांस्ड मिसाइलों में से एक है। ये पलक झपकते ही दुश्मन को ढेर कर देती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें विस्फोट नहीं होता, बल्कि 45 किलो वजनी मिसाइल में 6 धारदार ब्लेड्स लगे होते हैं। इससे बिना विस्फोट किए टारगेट को मारा जा सकता है। जवाहिरी को इसी मिसाइल से मारा गया। इस दौरान जवाहिरी के परिवार के अन्य सदस्यों को मामूली चोटें ही आई हैं। 2019 में पहली बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने आर9एक्स मिसाइल से हमले की रिपोर्ट की थी। इसमें बताया गया था कि मिसाइल का इस्तेमाल अफगानिस्तान, लीबिया, इराक, यमन और सोमालिया में बड़े आतंकियों को मारने के लिए किया गया। आर9एक्स को फ्लाइंग गिंसु भी कहा जाता है। यह एक जापानी चाकू होता है जिसे 1980 के दशक में टीवी विज्ञापनों में देखा जाता था। विज्ञापन में दिखाया जाता था कि चाकू टिन की बनी कैन आदि को कतर देता था और तब भी बेहद नुकीला और तेज बना रहता था। रिपोर्ट में बताया गया है कि आर9एक्स मिसाइल अपने टारगेट पर पूरी सटीकता के साथ हमले करता है। जैसे कि किसी कार में यदि किसी टारगेट को निशाना बनाया जाता है तो मिसाइल सिर्फ टारगेट को मारेगी और कार के ड्राइवर को कोई चोट भी नहीं आएगी। मिसाइल के ब्लेड इतने पैने होते हैं कि ये बिल्डिंगों और कार की छतों को काट सकते हैं। आर9एक्स हेलफायर मिसाइल टारगेटेड किलिंग के लिए मशहूर है। इससे आसपास बहुत कम कैजुअल्टी होती है, यानी आम नागरिकों की जान जाने का खतरा नहीं होता है। 2011 में जब बराक ओबामा राष्ट्रपति थे तब इस मिसाइल को बनाया गया था। ओबामा ने मिडिल ईस्ट में ड्रोन हमलों में कैजुअल्टी को कम करने के लिए इस मिसाइल को बनाने का आदेश दिया था। विस्फोटक नहीं होने के कारण इसे निंजा मिसाइल भी कहा जाता है। आर9एक्स मिसाइल को सीआईए और अमरीकी रक्षा विभाग के लिए लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्राप गुम्मन ने मिलकर बनाया है। अब तक एक दर्जन से ज्यादा मामलों में टारगेटेड किलिंग के लिए इसका यूज किया जा चुका है। यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले जनवरी 2019 की बात है। अमरीका ने इसी आर9एक्स मिसाइल के जरिए अपने सबसे बड़े दुश्मन में से एक आतंकी जमाल अल-बदावी को मार गिराया था। दरअसल, आतंकी जमाल अल-बदावी साल 2000 में यमन पोर्ट पर 17 अमरीकी सेना पर हुए हमले में शामिल था। इस हमले में अमरीकी सेना के सभी जवान मारे गए थे। अमरीका ने अपने जवानों की बेरहमी से हुई हत्या के करीब 19 साल बाद आर9एक्स मिसाइल के जरिए बदला लिया था। अब बात फरवरी 2017 में घटी उस तीसरी घटना की जब अमरीका ने आर9एक्स मिसाइल से दुनिया के एक और खूंखार आतंकी का खात्मा किया था। मिस्र का रहने वाला अहमद हसन अबू अल-खैर अल-मसरी इस वक्त आतंकी संगठन अल कायदा का नंबर 2 नेता था। इसे अमरीका ने सीरिया के इदलिब प्रोविंस में आर9एक्स मिसाइल से हमला कर मार गिराया था। रिपोर्ट के मुताबिक इस मिशन को अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने अंजाम दिया था। हालांकि सीआईए इस तरह के किसी हमले की बात को स्वीकार करने से बचता रहा है। 2017 में आर9एक्स मिसाइल से जब अल मसरी को मारा गया तो वह अपनी कार से कहीं जा रहा था। हमले की तस्वीरों में देखा गया कि कार की छत पर एक बड़ा छेद हो गया था और कार के अंदर सवार लोग व इंटीरियर सबका सब ऐसे कतर दिया गया था जैसे कैंची से काटा गया हो। इसके बावजूद कार का अगला और पिछला हिस्सा सलामत थे। 2017 में आर9एक्स मिसाइल से जब अल मसरी को मारा गया तो वह अपनी कार से कहीं जा रहा था। हमले की तस्वीरों में देखा गया कि कार की छत पर एक बड़ा छेद हो गया था और कार के अंदर सवार लोग व इंटीरियर सबका सब ऐसे कतर दिया गया था जैसे कैंची से काटा गया हो। अगस्त 2021 में अमरीका ने इसी आर9एक्स मिसाइल का इस्तेमाल अफगानिस्तान के नांगरहार प्रोविंस में 2 कुख्यात आईएसआईएस आतंकियों को मार गिराने के लिए किया था। अमरीकी सेना ने एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के जरिए इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इस हमले में 13 अमरीकी जवान मारे गए थे। अमरीका ने अल कायदा प्रमुख जवाहिरी को मारने से पहले अंतिम बार जून 2022 में सीरिया के इदलिब शहर में भी आर9एक्स हेलफायर मिसाइल का यूज किया था। उस दौरान हुर्रस अल दीन के आतंकी अबू हमजा अल यमनी को इस मिसाइल से मारा गया था। अमरीका ने अल कायदा प्रमुख जवाहिरी को मारने से पहले अंतिम बार जून 2022 में सीरिया के इदलिब शहर में भी आर9एक्स हेलफायर मिसाइल का यूज किया था। उस दौरान हुर्रस अल दीन के आतंकी अबू हमजा अल यमनी को इस मिसाइल से मारा गया था।
अमरीकी सीक्रेट मिसाइल जिससे सिर्फ आतंकी मरते हैं : न विस्फोट,न बेगुनाहों की मौतें