गुवाहाटी : राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता नयनमणि सैकिया ने असम और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। अपने परिवार और बच्चों से दूर बड़ी चुनौतियों से जूझ रही नयनमणि ने इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन बॉल में गोल्ड मेडल जीत कर देश के लोगों को गौरवान्वित की हैं। नयनमणि की इस जीत से असम सरकार के वन विभाग अधिक उत्साहित है क्योंकि नयनमणि सैकिया वन विभाग में कांस्टेबल हैं। 2008 से भारोत्तोलन में शामिल नयनमणि को 2011 में वन संरक्षण बल में एक कांस्टेबल के रूप में भर्ती किया गया था। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद वन विभाग नयनमणि सैकिया को बढ़ावा देने की तैयारी में है। नियमानुसार असम सरकार अंतर्राष्ट्रीय खेलों में सफलता हासिल करने वाले एथलीटों को पुलिस के डीएसपी के पद के समकक्ष पद पर नियुक्त करती है। इसलिए सरकार ने कांस्टेबल नयनमणि सैकिया को वन संरक्षण बल में डीएसपी के समकक्ष सहायक कमांडर के पद पर पदोन्नत करने का निर्णय लिया है। वन विभाग के नियमके अनुसार विशेष पदोन्नति केवल उच्चतम निरीक्षक स्तर तक ही दी जा सकती है। डीएसपी के समकक्ष सहायक कमांडर के पद पर पदोन्नति के लिए राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की मंजूरी आवश्यक है। इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा नयनमणि सैकिया को एक सम्मान के रूप में सहायक कमांडर के पद पर पदोन्नति के लिए आधिकारिक तौर पर घोषित करने की संभावना है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मीं नयनमणि की बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उन्होंने अपने खेल करियर की शुरुआत पहली बार 2008 में एक भारोत्तोलक के रूप में की थी हालांकि, पैर की चोट के कारण बाद में उन्होंने भारोत्तोलन छोड़ दिया और लॉन बॉल खेलना शुरू कर दिया। बाद में वह इस खेल के माध्यम से राष्ट्रीय टीम का अभिन्न अंग बन गई। शुरूआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लॉन बॉल खेलना जारी रखा। उन्होंने कई बार लॉन बॉल में असम और भारत का प्रतिनिधित्व किया। नयनमणि ने 2011 और 2015 के राष्ट्रीय खेलों में व्यक्तिगत और टीम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 2012 एशियन अंडर-25 लॉनबॉल चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीता था। नयनमणि ने 2014 और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।