गिग अर्थव्यवस्था यानी कुछ समय के लिए नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों की व्यवस्था ने कोरोना के बाद नए अवसर पैदा किए हैं। इससे वेतन के बदले काम का तत्काल भुगतान के रूप में कर्मचारियों को आय का नया जरिया मिल रहा है। वहीं स्थाई कर्मचारियों की तुलना में गिग वर्कर कंपनियों के लिए लागत के पैमाने पर फायदेमंद साबित हो रहे हैं। कंसल्टिंग फर्म बीसीजी और माइकल एंड सुसान डेल फाउंडेशन के हालिया सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। इससे लंबी अवधि में करीब नौ करोड़ रोजगार पैदा हो सकते हैं। काम के बदले भुगतान के आधार पर रखे गए कर्मचारियों को गिग वर्कर कहा जाता है। गिग वर्कर्स के लिए काम के कोई समय तय नहीं होता है। यह गिग अर्थव्यवस्था का हिस्सा होते हैं। गिग अर्थव्यवस्था से आशय रोजगार की ऐसी व्यवस्था से है जहां स्थायी तौर पर कर्मचारियों को रखे जाने के बजाए अल्प अवधि के लिए अनुबंध पर रखा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार गिग अर्थव्यवस्था कोई नई धारणा नहीं है। बल्कि प्रौद्योगिकी के साथ इसे तेजी से अपनाया जा रहा है। कोरोना और उसकी वजह से लगाए गए लॉकडाउन ने कंपनियों के लिए दोहरा संकट खड़ा कर दिया। काम बंद होने ने उन्हें भारी मात्रा में छंटनी करनी पड़ी। इसके बाद कारोबार शुरू होने पर उनके लिए फिर से बड़ी मात्रा में स्थाई कर्मचारी रखना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए कोरोना के बाद 70 फीसदी कंपनियों ने गिग वर्कर से लागत घटाने के लिए लिया काम लेने शुरू किया जो अब और ज्यादा जोर पकड़ने लगा है। स्थाई कर्मचारियों को आवागमन के लिए भत्ता, ईपीएफ, मेडिकल सुविधा के साथ कई अन्य तरह के भत्तों का भुगतान करता पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गिग वर्कर के मामले में कंपनियों को यह राशि नहीं देनी पड़ती और केवल काम के बदले भुगतान करना पड़ता है। इससे कंपनियों का खर्च बचता है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफा पर पड़ता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गिग वर्कर को तरीजह देने वाली गिग अर्थव्यवस्था से गैर-कृृषि क्षेत्रों में नौ करोड़ रोजगार सृजन में मदद मिल सकती है। इसमें कहा गया है कि अल्पावधि से दीर्घावधि में कुशल, कम कुशल और साझा सेवा के क्षेत्र में करीब 2.4 करोड़ रोजगार सृजित हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार सर्वाधिक सात करोड़ अस्थायी नौकरियां निर्माण, विनिर्माण, परिवहन और लॉजिस्टक तथा व्यक्तिगत सेवा क्षेत्रों में हैं। साथ ही इससे दीर्घकाल में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.25 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार अनुसार उसका अनुमान विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के प्रकार का विस्तृत अध्ययन पर आधारित है। यह निष्कर्ष बड़ी और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों समेत विभिन्न कंपनियों से बातचीत के आधार पर निकाला गया है। इसको लेकर शहरी परिवार के बीच सर्वे किया गया तथा उद्योग विशेषज्ञों की राय ली गई।