बीजिंग : बचपन में आपने अकसर बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि उधर मत जाना वरना ‘झोली बाबा’ आ जाएगा। जब हम पूछते झोली बाबा क्या करेगा? तो जवाब मिलता कि वो बच्चों को झोले में भरकर ले जाता है और उनकी आंख, नाक, कान निकालकर बेच देता है। चीन इस वक्त वही झोली बाबा बन चुका है, जो अपने ही देश के कैदियों के किडनी, लिवर और हार्ट जैसे अंगों का धंधा कर रहा है। दुनिया इसे ‘फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग’ कहती है। इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं फालुन गोंग और उइगर मुसलमान जैसे हाशिए पर पड़े समुदाय, जिन्हें चीन सरकार अपने लिए रोड़ा मानती है। चीन सरकार का दावा है कि देश में हर साल करीब 10,000 ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। ये संख्या सरकारी है। अलग-अलग इंडिपेंडेंट सोर्सेज   का दावा है कि चीन में गुप्त तरीके से हर साल 25,000 से 50,000 लोगों का मर्डर करके करीब 60 हजार से 1 लाख ऑर्गन ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। अब सवाल उठता है कि चीन ने इतने बड़े पैमाने पर फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग का धंधा कैसे खड़ा किया है?  फालुन गोंग चीन का एक समुदाय है जिसकी शुरुआत 1992 में आध्यात्मिक गुरु ली होंगजी ने की थी। ये लोग मेडिटेशन की एक खास पद्धति की प्रैक्टिस करते हैं, जिससे बड़े-बड़े रोग मिटने के दावे किए जाते हैं। शुरुआत होने के महज 7-8 साल में इसे मानने वाले की संख्या 10 करोड़ तक पहुंच गई थी। यानी चीन का हर 12 में से 1 व्यक्ति फालुन गोंग का अनुयायी था। तभी चीन में उस वक्त के प्रेसिडेंट जिआंग जेमिन ने फालुन गोंग समुदाय को चीन की शांति के लिए खतरा घोषित कर दिया। इसके बाद से ही लगातार इस धर्म के मानने वालों का दमन जारी है। उइगर मुस्लिम चीन का एक अल्पसंख्यक समुदाय है जो शिनजियांग प्रांत में रहता है। चीन इन्हें स्वदेशी समूह मानने से इनकार करता है और इन पर आतंकवाद और अलगाववाद के आरोप लगाता रहा है। इसलिए उइगर मुस्लिमों के साथ भेदभाव होता है और उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। चीन में फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग के लिए जेल में बंद फालुन गोंग और उइगर जैसे कमजोर तबकों को मारना कई पुराने अनैतिक मेडिकल प्रैक्टिसेज की याद दिलाता है।