डिब्रूगढ़ : असम-अरुणाचल के बीच जारी सीमाई विवादों के समाधान के लिए  लंबे समय से मंथन चल रहा है।  कई बार दोनों राज्यों की जनता के बीच खूनी संघर्ष होने के कारण परिस्थितियां बहुत खराब होती रही हैं, लेकिन दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बाद सीमाई विवादों के समाधान के लिए एक सकारात्मक पहल शुरू हुई है। अरुणाचल प्रदेश ने काफी वर्षो पहले डिब्रूगढ़ जिले व नाहरकटिया विधानसभा क्षेत्र के नामसांग चाय बागान पर अपनी दावेदारी पेश की थी, जिसके बाद उक्त मामले के मद्देनजर बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के जनस्वास्थ्य तकनीकी विभाग व जल संसाधन विभाग के मंत्री वांगकी लोवांग के नेतृत्व में बोरदूरिया के विधायक वांगलीन लोवांगडोंग, तिराप जिले के तारो  सहित कई अन्य अधिकारियों का दल असम के नाहरकटिया अंचल पहुंचा जहां असम सरकार की तरफ से नाहरकटिया के विधायक तरंग गोगोई और  डिब्रूगढ़ के जिला उपायुक्त विश्वजीत पेगु ने अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का असमिया परंपरा के अनुसार सराय व फुलाम गामोछा पहनाकर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान डिब्रूगढ़ के जिला उपायुक्त विश्वजीत फुकन, पुलिस अधीक्षक श्वेतांक मिश्रा,नाहरकटिया के चक्रधिकारी शरद गोगोई के साथ कई सरकारी अधिकारी उपस्थित थे। दोनों राज्यों के प्रतिनिधि दल असम- अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित नामसांग चाय बागान पहुंचे जहां से प्रवाहित बूढ़ीदिहि नदी दोनों राज्यों की सीमा निर्धारित करती है। चाय बागान का नाम सिर्फ नामसांग होने के कारण अरुणाचल प्रदेश की तरफ से दावेदारी पेश किए जाने की बात कही जा रही है जबकि यहां रहने वाले लगभग शत-प्रतिशत लोग चाय बागान के आदिवासी समुदाय के लोग हैं, जो असम में अपने मताधिकार का प्रयोग करते हंै और असम सरकार की तरफ से उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इन सबकी जानकारी लेने के बाद दोनों ही दल चाय बागान के गेस्ट हाउस पहुंचे जहां अरुणाचल प्रदेश के प्रतिनिधि दल को बागान से संबंधित दस्तावेज की जानकारी प्रदान की गई। अरुणाचल प्रदेश के जनस्वास्थ्य तकनीकी विभाग व जल संसाधन विभाग के मंत्री वांगकी लोवांग ने बताया कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बैठक कर यह निर्णय लिया कि हरेक जिले के उप समिति संबंधित क्षेत्रों में जाकर वहां की जानकारी लें। अरुणाचल प्रदेश के लोगों द्वारा असम की भूमि दखल किए जाने के संबंध में प्रश्न किए जाने पर अरुणाचल प्रदेश के जनस्वास्थ्य तकनीकी विभाग व जल संसाधन विभाग के मंत्री वांगकी लोवांग ने कहा कि नामसांग अंचल पंर इस प्रकार की कोई समस्या नहीं है, लेकिन असम अरुणाचल प्रदेश की सीमा बहुत लंबी है। इसलिए कुछ इलाकों में कुछ समस्याएं हो सकती हैं। असम सरकार की तरफ से प्रतिनिधित्व कर रहे नाहरकटिया के विधायक तरंग गोगोई ने बताया कि नामसांग चाय बागान पर एक समय पर अरुणाचल प्रदेश ने दावेदारी पेश की थी। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा की चेष्टा से आज अरुणाचल प्रदेश के मंत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि दल आया है। दोनों ही राज्यों के प्रतिनिधियों ने सीमांत अंचलों का संयुक्त रूप से दौरा किया। इस दौरे के बाद दोनों ही दल अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे कि चाय बागान अंचल में कहां के लोग रहते है।