गुवाहाटीः मुख्यमंत्री डॉ.हिमंत विश्वशर्मा ने वृहस्पतिवार को कहा कि दुर्गा पूजा से पहले तामुलपुर, गोलाघाट,बंगाईगांव, मोरीगांव और धेमाजी में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा और इनके लिए टेंडर भी हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) ने दो दिन पहले धुबरी मेडिकल कॉलेज को मान्यता दी है, जिससे राज्य में मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। उन्होंने कहा कि असम के पिछड़े जिलों जैसे डिफू और धुबड़ी में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं। कालापहाड़ और एमएमसी को जोड़कर गुवाहाटी में दूसरे मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके समानांतर में नगांव और तिनसुकिया में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने उपरोक्त आशय की बातें आज यहां असम सचिवालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कही। इस मौके पर सीएम ने कहा कि राज्य सरकार सभी उम्र के लोगों के लिए स्वस्थ जीवन शैली और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान असम के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा का विचार उन लोगों के लिए किया जा रहा है जो आयुष्मान भारत के दायरे से बाहर रह गए हैं। इसमें वरिष्ठ नागरिकों, पत्रकारों और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना आदि के राशन कार्ड के बिना लोगों को कवर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि छह गंभीर बीमारियों के लिए अटल अमृत अभियान और 27 लाख गरीब लोगों के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है। इसके अलावा असम में 60 लाख परिवारों के पास राशन कार्ड हैं और 27 लाख परिवारों के पास अरुणोदोई योजना कार्ड हैं उन्होंने कहा कि जो लोग आयुष्मान भारत योजना से पीछे छूट गए हैं, वे आयुष्मान असम से लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने असम के स्वास्थ्य क्षेत्र में 150 नई जोड़ी गई एम्बुलेंसों में से 83 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि सरकार असम के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को मुफ्त आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने और राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि 108 मृत्युंजय एम्बुलेंस सेवा को आधिकारिक तौर पर 6 नवंबर, 2008 को राज्य में शुरू किया गया था। उल्लेखनीय है कि इसने गणेशगुड़ी बम विस्फोटों के दौरान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस सेवा ने अब तक लगभग 200,000 लोगों को निश्चित मृत्यु से बचाया है। उन्होंने कहा कि संचालन एजेंसी जीवीके के माध्यम से संचालित आपातकालीन सेवा केंद्रों को अब तक लगभग 3 करोड़ 91 लाख कॉल प्राप्त हुए हैं और लगभग 19 लाख गर्भवती महिलाओं को आपातकालीन सेवाएं प्राप्त हुई हैं। वर्तमान में 779 बेसिक लाइफ सपोर्ट सर्फेस एम्बुलेंस,14 एडवांस लाइफ सपोर्ट सर्फेस एम्बुलेंस और 1 बोट एम्बुलेंस सहित कुल 800 एम्बुलेंस जनता को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं। यह सेवा शुरू से ही केंद्र सरकार की सहायता से शुरू की गई थी,लेकिन अब राज्य सरकार स्वयं प्राथमिकता निधि के उपयोग के माध्यम से अपने दम पर एम्बुलेंस सेवा प्रदान कर रही है। जीवीके की सिफारिश के अनुसार बदले जाने वाले 300 एम्बुलेंसों में से 150 एम्बुलेंस की पहचान की जा चुकी है और उन्हें हटा दिया गया है। साथ ही नए जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन 150 एम्बुलेंसों को बदला जाना है, उन्हें जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार 15 वर्ष से अधिक के वाहनों को हटाकर नीलामी या स्क्रैप में परिवर्तित किया जाना चाहिए। हालांकि, मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को गैर सरकारी संगठनों या सामाजिक संगठनों को शव वाहक वाहनों या मुफ्त सामाजिक गतिविधियों के लिए मुफ्त में पुरानी एम्बुलेंस उपलब्ध कराने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सेवाएं समाप्त हो चुकी हैं। एंबुलेंस वाहनों की मरम्मत करके पशु स्वास्थ्य देखभाल या मनुष्य स्वास्थ्य सेवा की सुविधा के लिए मानवीय दृष्टिकोण से उचित उपयोग के लिए गैर सरकारी संगठनों या सामाजिक संगठनों को सौंपने की योजना लंबे समय से बनाई गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ के दौरान लोगों को चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कोचीन शिपयार्ड से अत्याधुनिक बोट एंबुलेंस खरीदने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नाव एम्बुलेंस ब्रह्मपुत्र के तटवर्ती लोगों के साथ क्षेत्रों के अन्य लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं और साथ ही शल्य चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने में सक्षम बनाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद राज्य में सामान्य चिकित्सा सेवाओं को स्वाभाविक स्तर पर उपलब्ध कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि असम के सभी एफआरयू में शल्य चिकित्सा विभाग रखने का प्रयास किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए हर जिला अस्पताल में रात्रि शल्य चिकित्सा की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार कर मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। बैठक में भाग लेकर स्वास्थ्य मंत्री केशव महंत ने कहा कि 108 मृत्युंजय सेवा असम में 2008 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की दूरदर्शी पहल के कारण शुरू की गई थी। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव अविनाश जोशी ने भी अपनी बातें रखी। डॉ. एमएस लक्ष्मी प्रिया, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम ने स्वागत भाषण दिया और डॉ. मनोज चौधरी, कार्यकारी निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, असम और अतिरिक्त निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया। बैठक में जीवीके-ईएमआरआई के उपाध्यक्ष संजय झा, टाटा मोटर्स के प्रतिनिधि संजीव नारायण और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
दुर्गा पूजा से पहले असम में और पांच मेडिकल कॉलेज : सीएम