स्थानीय स्तर पर उगने वाले कई पौधे समाप्त होते जा रहे हैं। नर्सरी में भी वैसे पौधे लगाने को नहीं मिल रहे हैं। जबकि उन पौधों का काफी महत्व है। यह समस्या पूरे देश की है। इसको लेकर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ने चिंता जाहिर करते हुए स्थानीय पौधों के संरक्षण के लिए महाअभियान चलाने का निर्णय लिया है। विश्व पर्यावरण दिवस के दिन पूरे देश में एक साथ घर-घर नर्सरी अभियान की शुरुआत होगी। इसके तहत सभी लोगों से स्थानीय पौधों का बीज संग्रह कर घर में नर्सरी तैयार करने का आग्रह किया गया है। चाहे वह चार से पांच बीज से तैयार क्यों न हो। फिर उस तैयार पौधों को अपने आसपास या जहां जगह उपलब्ध हो सभी लोग लगाने का काम करेंगे। झारखंड सहित सभी प्रांतों में लाखों पौधे लगाने की तैयारी की गई है। इसके लिए जगह जगह पर्यावरण संरक्षण गतिविधि से जुड़े लोगों ने नि:शुल्क पौधा वितरण की भी व्यवस्था की है। गतिविधि से जुड़े लोग पौधा लगाने के साथ ही उसे बचाने का भी संकल्प लेंगे। इसके साथ ही हाल ही में नदियों व तालाबों की सफाई भी गतिविधि से जुड़े लोग करेंगे।

कई स्थानीय पौधे विलुप्त होने के कगार पर : पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुरभि तोमर का कहना है कि अनुभव से पता चलता है कि देश के सभी राज्यों में स्थानीय स्तर पर जो पौधे होते थे उसमें कईं विलुप्त होने के कगार पर है। इनमें सुंदरी, रेड सैंडवुड, खसिना, मुसली, महोगनी, आम के कई प्रकार, सीताफल आदि शामिल हैं। वहीं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि झारखंड के प्रांत पेड़ आयाम प्रमुख पंकज श्रीवास्तव का कहना है कि जैसे विलुप्त हो रही स्थानीय बोली व भाषा को बचाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है उसी तरह स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो रहे पेड़-पौधों को बचाने के लिए अभियान चलाने की जरूरत है। आज जंगल में भी कई पौधे नहीं मिलते हैं। इनमें बीजासाल अथवा पैसार, सांदन, काझ, पाकड़ , लाठीबांस, धौव, करम, सीता अशोक आदि अनेक स्थानीय प्रजातियों की संख्या घटती जा रही है। इनकी घटती संख्या का कारण जंगलों का उजडऩा है और वनरोपन में इन प्रजातियों को रोपने पर महत्व नहीं देना है। पंकज श्रीवास्तव सहायक वन संरक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। झारखंड प्रांत के सह प्रांत संयोजक सच्चिदानंद मिश्र ने कहा कि पौधारोपण अभियान में धार्मिक संगठन, नारी शक्ति, शिक्षण संस्थान और एनजीओ से भी सहयोग लिया जाएगा। वैसे पौधे ज्यादा लगाए जाएंगे जो आक्सीजन ज्यादा देता है। इसके साथ ही आम, आंवला, नीम, सखुआ, कटहल आदि के पौधे भी लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ ही उसको बचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। लोग पौधे लगा तो देते हैं परंतु बचाने का उपाय नहीं करने के कारण 60 से 70 प्रतिशत पौधे मर जाते हैं। इसलिए गतिविधि बचाने पर ज्यादा जोर दे रहा है।