गुवाहाटी : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि अपनी मातृभाषा के अलावा किसी अन्य भाषा में शिक्षा लेने के कारण 95 प्रतिशत भारतीय अपनी प्रतिभा को ठीक से व्यक्त करने से वंचित रह जाते है। अंग्रेजी प्रेम ने 95 प्रतिशत प्रतिभा को नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में अंग्रेजी भाषा की लत ने 95 प्रतिशत छात्रों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने से वंचित कर दिया है। उन्होंने आगे कहा कि जो छात्र अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में नहीं गए हम उनके साथ अन्याय नहीं कर सकते। अंग्रेजी के प्रति कमजोरी के कारण ही देश की 5 प्रतिशत बुद्धि का ही देश निर्माण में उपयोग हो पाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 95 प्रतिशत छात्र अपनी मातृभाषा में शिक्षित हैं और केवल 5 प्रतिशत छात्र अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ते हैं। वह 95 प्रतिशत छात्र भी उतना ही प्रतिभाशाली है, लेकिन इन्हें वंचित किया जाता हैं। गृह मंत्री ने मातृभाषा माध्यम के छात्रों के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा, एनईईटी और जेईई परीक्षा अब 12 आधुनिक भारतीय भाषाओं में आयोजित की जाती हैं। इसके अलावा, केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा 13 भाषाओं में आयोजित की जाती है। 10 राज्यों के 20 कॉलेजों में स्नातकोत्तर स्तर तक के इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम पहले ही स्थानीय भाषाओं में तैयार किए जा चुके हैं। जल्द ही हिंदी, कन्नड़, बंगाली और गुजराती भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की जाएगी। जिस दिन मातृभाषा माध्यम के छात्रों को उनका हक मिलेगा, देश सूरज की तरह चमकेगा। केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य ऐसे लक्ष्य पर है और कोई भी दल इस नीति का विरोध नहीं करता है। उन्होंने नई शिक्षा नीति को देश की आत्मा बताया। मंत्री ने कहा कि यह नीति भारतीयता का प्रतिबिंब है जिसके बीज नरेंद्र मोदी पहले ही बो चुके हैं। इस बीज की फसल एक पूर्ण वृक्ष के रूप में विकसित होगी और कुछ ही वर्षों में पूरी दुनिया को छाया प्रदान करेगी।
अंग्रेजी प्रेम ने 95 प्रतिशत प्रतिभा को कर दिया नष्ट : अमित शाह