वॉशिंगटन/ताईपेई : ताइवान पर लगातार सैन्य दबाव बना रहे चीन को अमरीका ने बहुत सख्त जवाब दिया है। रविवार को अमरीकी नेवी ने अपने दो बेहद खतरनाक और हाईली एडवांस्ड न्यूक्लियर वॉरशिप ताइवान की खाड़ी में तैनात कर दिए। अमरीकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी की विजिट के बाद से ही चीनी सेना ताइवान के बिल्कुल नजदीक मिलिट्री एक्सरसाइज कर रही है। अब पहली बार अमरीका ने जवाबी कार्रवाई की है। खास बात यह है कि अमरीका के इस एक्शन के फौरन बाद चीन के तेवर ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। रविवार को जब अमरीकी वॉरशिप ताइवान स्ट्रैट पहुंचे तो चीन ने कहा- हम हालात पर नजर रख रहे हैं। तनाव बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी या चीन की सेना) ने ताइवान के चारों तरफ 6 ‘नो एंट्री जोन’ घोषित किए हैं। यानी अब इन 6 रास्तों से कोई पैसेंजर प्लेन या शिप ताइवान नहीं पहुंच सकते हैं। चीन ने ताइवान के चारों ओर अपने जे-20 फाइटर जेट और युद्धपोतों की तैनाती कर दी है। चीन की सेना नॉर्थ, साउथ-वेस्ट और साउथ-ईस्ट में ताइवान के जल और हवाई क्षेत्र में मिलिट्री ड्रिल कर रही है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रविवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक- कई साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब अमरीका ने चीन की सैन्य ताकत को सीधे तौर पर चैलेंज किया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि अमरीका ने एक नहीं बल्कि दो वॉरशिप इस इलाके में तैनात किए हैं। चीन को पहली बार अहसास हो रहा है कि अब अमरीकी नेवी ताइवान की मदद के लिए मोर्चा संभालने को तैयार है। इसका असर चीन की डिफेंस और फॉरेन मिनिस्ट्री के बयानों में भी देखा गया। दोनों ही मंत्रालयों ने एक ही बात कही। बयान में कहा गया- हम ताइवान स्ट्रैट में तनाव नहीं बढ़ाना चाहते। हम सिर्फ मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहे हैं। अमरीका को भी टेंशन बढ़ाने से बाज आना चाहिए। ताइवान हमारा हिस्सा है। चीन के बयान के बाद अमरीकी नेवी ने भी जवाब दिया। उसने कहा- हिंद महासागर और इसके रास्तों पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। ये सबके लिए है और इसे फ्री ही रखा जाएगा। हम किसी भी एक्शन के लिए तैयार हैं। अमरीका ने 1979 में चीन के साथ रिश्ते बहाल किए। ताइवान से डिप्लोमैटिक रिश्ते तोड़ लिए। हालांकि चीन के ऐतराज के बावजूद अमरीका फिर भी ताइवान को हथियार सप्लाई करता रहा। अमरीका भी वन चाइना पॉलिसी का समर्थन करता है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर उसकी पॉलिसी साफ नहीं है। राष्ट्रपति जो बाइडेन फिलहाल, इस पॉलिसी से बाहर जाते दिख रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है तो अमरीका उसके बचाव में उतरेगा। बाइडेन ने हथियारों की बिक्री जारी रखते हुए अमरीकी अधिकारियों का ताइवान से मेल-जोल बढ़ा दिया। इसका असर ये हुआ कि चीन ने ताइवान के हवाई और जलीय क्षेत्र में अपनी घुसपैठ तेज कर दी। चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और अमरीका वहां सीमित जहाज ही भेज सकता है। अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया तो पश्चिमी प्रशांत महासागर में दबदबा दिखाने लगेगा। इससे गुआम और हवाई द्वीपों पर मौजूद अमरीका के मिलिट्री बेस को भी खतरा हो सकता है। चीन मानता है कि ताइवान उसका एक राज्य है, जबकि ताइवान खुद को एक आजाद देश मानता है। इस झगड़े को समझने के लिए दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के वक्त में जाना होगा।
अमरीका ने एटमी हथियारों से लैस दो वॉरशिप ताइवान में किए तैनात