गुवाहाटीः पुलिस महानिदेशक और अल्पसंख्यक समुदाय के चार संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में समुदाय के कुछ विधायकों के अलावा ‘ऑल असम तंजीम मदरसा, ‘अहले सुन्नत वल जमात’, ‘ऑल असम इस्लामिक रिसर्च सेंटर’ और ‘नदवातुत तामीर’ के प्रतिनिधि मौजूद थे। बैठक के बाद डीजीपी भास्कर ज्योति महंत ने बताया कि अधिकतम मदरसों का संचालन बिना उचित पंजीकरण के किया जा रहा है, जो कानून की दृष्टि से सही नहीं हैं और मदरसा संचालक नियमों का सही ढ़ंग से पालन करें। मौके पर उपस्थित पत्रकारों से गुफ्तगू करते हुए डीजीपी ने कहा कि बैठक के दौरान संगठनों ने राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ अपना पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही समूहों के प्रतिनिधियों को मदरसा चलाते समय कुछ नियमों को लागू करने के लिए कहा गया है। बैठक में मूल संगठनों के तहत मदरसों से खुद को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत कराने का आग्रह किया गया है ताकि आतंकी धर्म तथा मदरसे की आड़ में देश विरोधी कार्य न कर पाएं। डीजीपी ने कहा कि संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस द्वारा दिए गए सुझावों को शामिल करने का भी आश्वासन दिया। डीजीपी ने बताया कि नियमों के आधार पर हमने उन सभी को अपने नियम ऑनलाइन अपलोड करने को कहा और इन नियमों को अपलोड करने के लिए कुछ समय दिया गया। नियम लागू होने के बाद मूल निकायों को इसे ऑनलाइन पोर्टल पर डालना होगा। उन्होने कहा कि राज्य में शांति कायम करने के लिए अल्पसंख्यक संगठमों के सहयोग के बिना हम राज्य में अलकायदा और अन्य आतंकी माड्यूल का भंडाफोड़ नहीं कर सकते हंै,हमने उनसे अपना समर्थन और सहयोग देने का आग्रह किया। बैठक के दौरान उन्होंने हमें अपने समर्थन देने का वादा भी किया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में खबर आई थी कि कुछ आतंकी धार्मिक शिक्षकों के वेश में राज्य में घुस आए हैं और चुपचाप अपनी हिंसक और देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। उसके आधार पर ही पुलिस ने अल-कायदा इंडियन कॉन्टिनेंट और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) से जुड़े 38 लोगों को गिरफ्तार किया है। उल्लेखनीय है कि चार समूहों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगले छह महीनों में पूरे असम में मदरसों का भी सर्वेक्षण किया जाएगा। हम धर्म के नाम पर बुरे काम करने वाले लोगों की सराहना नहीं करते हैं। हम पुलिस की ओर से मांगे गए सहयोग का समर्थन करते हैं। पुलिस की ओर से मदरसों में धार्मिक शिक्षा के अलावा विभिन्न विषयों में तकनीकी प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं। असम के डीजीपी ने हमें पुलिस सत्यापन और असम के बाहर से मदरसों में आने वाले व्यक्तियों की सभी सूचनाओं की जांच करने का भी निर्देश दिया है। प्रतिनिधियों ने कहा कि अगले छह महीनों में पूरे असम में मदरसों का भी सर्वेक्षण किया जाएगा। मौलाना अब्दुल कादिर कासिमी ने कहा कि सामान्य मदरसा पाठ्यक्रम में गणित, भूगोल आदि जैसे सामान्य विषयों को शामिल करने के डीजीपी महंत के सुझाव प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यक बोर्डों के प्रमुखों ने सभी बोर्ड प्रमुखों के सदस्यों के साथ उचित बातचीत के बाद सुझाव को लागू करने का आश्वासन दिया है। अन्य राज्यों से असम आने वाले इमामों और शिक्षकों के पुलिस सत्यापन के बारे में कानूनी प्रारूप के अनुसार मदरसे के सभी विवरण पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
बिना पंजीयन के मदरसों का संचालन संभव नहीं