वर्षा जल का संरक्षण पेयजल उपलब्धता का बहुत बड़ा स्रोत है। तेजी से बढ़ते जल संकट को देखते हुए यदि अब भी पानी नहीं रोका गया तो भविष्य में गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। भावी पीढ़ी को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। इस गंभीर संकट को पहचानते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल विश्व जल दिवस पर जलशक्ति अभियान कैच द रेन शुरू किया है। जिसके तहत बारिश के पानी को सहेजने अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा रहा है। बुरहानपुर में तैयार किया गया पानी एप जल आंदोलन को जन आंदोलन बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह बात हाल ही में मप्र के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने वर्चुअल प्लेटफार्म से पानी एप का लोकार्पण करते हुए कही। मुख्य कार्यक्रम शहर के इंदिरा कालोनी स्थित आडिटोरियम में किया गया था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि खुद को उदाहरण बनाकर पानी बचाने की पहल करें। दैनिक जीवन में कई अवसरों पर पानी की बचत की जा सकती है। जल समृद्घता और संरक्षण के लिए पौधरोपण भी बेहद जरूरी है। उन्होंने गुजरात का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के कई जिले बारिश का पानी कुओं में एकत्र कर सालभर पेयजल के लिए उपयोग करते हैं। जल संरक्षण का कार्य अकेले सरकार के प्रयासों से संभव नहीं हो सकता। इसे जन आंदोलन बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने आगामी वर्षा ऋतु में छत, मोहल्ले, खेत और गांव में बरसने वाले पानी के संग्रह का आह्वान किया। पानी एप का लोकार्पण होने के बाद करीब एक हजार लोगों ने इसे अपने मोबाइल पर डाउनलोड किया। कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश के पशुपालन व जिले के प्रभारी मंत्री प्रेमसिंह पटेल ने कहा कि जल संरक्षण के लिए अब समाज को सचेत होना होगा। जिस तेजी से भूमिगत जलस्तर गिर रहा है, यदि रोका नहीं गया तो भावी पीढ़ी के सामने जीवन की समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री के अमृत सरोवर बनाने के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि तालाबों के निर्माण के लिए सरकार के साथ समाज को भी आगे आना होगा। बुरहानपुर जिला हर काम में अव्वल रहा है। अमृत सरोवरों के निर्माण का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इसके लिए अर्चना चिटनीस व सभी जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन को बधाई देता हूं। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि हमारी वरिष्ठ नेता अर्चना चिटनीस लंबे समय से जल संरक्षण व संवर्धन के काम में जुटी हैं।