नई दिल्ली : कर्नाटक हिजाब विवाद मामले की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच में सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ड्रेस कोड लागू करने का मतलब है कि आप लड़कियों को कॉलेज जाने से रोक रहे हैं। इस पर जस्टिस गुप्ता ने कहा कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है। पिछले दिनों ही एक महिला वकील सुप्रीम कोर्ट में जींस पहनकर आ गईं, उन्हें तुरंत मना किया गया। उसी तरह गोल्फ कोर्स का भी अपना ड्रेस कोड है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा- हम जोर देकर कह रहे हैं कि हिजाब का जो अभी विवाद है, वो धार्मिक नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान संजय हेगड़े (याचिकाकर्ता के वकील) ने कहा कि कॉलेज में ज्यादा कपड़े पहनना ड्रेस कोड का उल्लंघन नहीं है। धार्मिक वजहों से टारगेट किया गया है। इसलिए इतना विवाद खड़ा किया गया। इस पर जस्टिस गुप्ता ने कहा कि कोई लड़की मिनी स्कर्ट पहनकर कॉलेज आ सकती है? कोड लागू ना करें तो कुछ भी पहनने की आजादी होगी? मौलिक अधिकार का भी मामला है। संजय हेगड़े ने कहा कि स्टेट लॉ के मुताबिक कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी की कोई कानूनी मान्यता नहीं है, जबकि यही कमेटी ड्रेस कोड तय करती है। सवाल ये भी है। जस्टिस गुप्ता ने कहा कि ड्रेस कोड कौन तय करता है? मुस्लिम कॉलेज में भी हिजाब पर पाबंदी है? क्रिश्चियन कॉलेज में भी हिजाब पहनकर जाने की व्यवस्था है? एडवोकेट जनरल ने कहा कि राज्य सरकार ने कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी को अधिकार दे दिया है। कमेटी ही तय करती है। इसमें शिक्षक, पेरेंट्स, स्थानीय विधायक होते हैं। मुस्लिम कॉलेज में वहां की कमेटी तय करती है। क्रिश्चियन कॉलेज में हिजाब पहनकर जाने की अनुमति नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में हिजाब विवाद पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 23 याचिकाएं दाखिल हैं। इन याचिकाओं को मार्च में दाखिल किया गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट राजीव धवन, दुष्यंत दवे, संजय हेगड़े और कपिल सिब्बल भी पक्ष रख रहे हैं।
कर्नाटक हिजाब विवाद पर सुनवाई एससी ने कहा- ये धार्मिक मामला नहीं