तेजू : सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगती सीमा की सुरक्षा कर रही लगभग सभी अग्रिम सीमा चौकियों के पास कम से कम एक बड़ा हेलीपेड होगा ताकि बहु-उद्देश्यीय चिनूक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर तेजी से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को जुटाया जा सके। उन्होंने बताया कि यह इस क्षेत्र में सेना की युद्ध के लिए तैयार रहने की क्षमताओं को बढ़ाने की कवायद का हिस्सा है। प्रत्येक अग्रिम सीमा चौकी और सेना की टुकडç¸यों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की गतिविधियों पर निगरानी को मजबूत करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के साथ जोड़ा जा रहा है और इन सभी के लिए अलग से उपग्रह टर्मिनल होंगे। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सेना की टुकड़ियों को नए घातक हथियार, रिमोट द्वारा संचालित विमान प्रणालियां, पथरीले रास्तों पर भी चलने वाले वाहन और संचार एवं निगरानी उपकरण प्रदान किए गए हैं। सेना ने एलएसी पर चीन की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए रखने के लिए अग्रिम चौकियों पर स्वदेश निर्मित रिमोट संचालित विमान बड़ी संख्या में तैनात किए हैं। पूर्वी अरुणाचल प्रदेश में माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर, ब्रिगेडियर टी एम सिन्हा ने राज्य के दौरे पर आए पत्रकारों के एक समूह से कहा कि हम पूर्वी सेक्टर में अग्रिम इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास पर अब काफी जोर दे रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि क्षमता बढ़ाने की पहल के तौर पर सेना ने अरुणाचल प्रदेश में अपनी टुकड़ियों को पथरीले रास्तों पर भी चलने में सक्षम अमेरिका निर्मित वाहन, इजराइल से 7.62 एमएम नेगेव लाइट मशीन गन और विभिन्न अन्य घातक हथियार सौंपे हैं। उन्होंने बताया कि अग्रिम चौकियों पर हेलीपेड बनाए जा रहे हैं ताकि चिनूक 47 (एफ) हेलीकॉप्टर उतर तथा उड़ान भर सकें। इन हेलीकॉप्टरों को 2015 में हुए एक करार के तहत अमेरिका से खरीदा गया है। अधिकारियों ने कहा कि अग्रिम चौकियों पर हेलीपेड का निर्माण जोरशोर से चल रहा है और हर आठ से 10 किलोमीटर की दूरी पर ऐसे हेलीपेड बनाने का लक्ष्य है। ब्रिगेडियर सिन्हा ने कहा कि इन हेलीपेड के निर्माण से अग्रिम इलाकों में चिनूक उड़ान भर सकेंगे तथा इससे सैनिकों तथा सैन्य उपकरणों को त्वरित गति से जुटाया जा सकेगा। सेना ने अरुणाचल प्रदेश में एलएसी पर पर्वतीय क्षेत्रों में एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपें भी तैनात की हैं, जिन्हें आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। एम-777 को चिनूक विमानों से तेजी से ले जाया जा सकता है। गौरतलब है कि भारत और चीन की सेनाओं के बीच पांच मई 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा में गतिरोध पैदा हुआ था। इससे पहले दोनों सेनाओं के बीच पैंगोंग झील इलाकों में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर अपनी तैनाती धीरे-धीरे बढ़ा दी। गलवान घाटी में हुई भीषण भिड़ंत के बाद तनाव और बढ़ गया था। सैन्य और राजनयिक बातचीत के कई दौर के बाद दोनों पक्षों ने गोगरा क्षेत्र और पैंगोग झील के उत्तरी व दक्षिणी किनारे से पीछे हटने की प्रक्रिया को पिछले साल पूरा किया। बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों ने घोषणा की कि गोगरा हाटस्पि्रंग क्षेत्र में पेट्रोलिंग बिंदु 15 से भी पीछे हटना शुरू कर दिया गया है। एलएसी से लगते संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूदा समय में प्रत्येक पक्ष के करीब 50 से 60 हजार जवान तैनात हैं।
अरुणाचल : एलएसी पर सेना की अग्रिम चौकियों पर बनेंगे हेलीपैड