गुवाहाटीः असम विधानसभा के अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी की ओर से विपक्षी सदस्यों द्वारा पेश किए गए तीन स्थगन प्रस्तावों को खारिज किए जाने के बाद सोमवार को असम विधानसभा को कुछ समय भारी हंगामा होने के बाद कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी और राइजर दल के एक मात्र विधायक अखिल गोगोई ने विधानसभा सत्र के पहले दिन दो प्रस्ताव लाए, जिसमें स्थानीय माध्यमिक  विद्यालयों में कक्षा 3 से अंग्रेजी में गणित और विज्ञान पढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले पर चर्चा की मांग की गई। एआईयूडीएफ ने अपने प्रस्ताव में  राज्य भर में किए गए  बेदखली अभियानों की श्रृंखला और बेदखल परिवारों की स्थिति पर चर्चा करने की मांग की। सदन में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने अपनी पार्टी के प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए  कहा कि अंग्रेजी में शिक्षा प्रदान करने के निर्णय का स्कूली बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, इसलिए हमें इस पर तत्काल चर्चा करने की आवश्यकता है। सैकिया का समर्थन करते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि असम सरकार का निर्णय केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विपरीत है, केंद्रीय शिक्षा नीति जो मातृभाषा में सीखने पर अधिक जोर देती है, जबकि असम सरकार उस नीति के विपरीत दिशा में जा रही है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्रशासन स्कूलों को किसी न किसी बहाने से बंद कर रही है।  विपक्ष के नेताओं ने कहा कि आम लोगों से जुड़े  इन विषयों पर पहले चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर विस अध्यक्ष विश्वजीत दैमारी ने कहा कि इस विषय पर अन्य माध्यमों से चर्चा की जा रही है। अखिल गोगोई का नोटिस पहले ही एक विधायक द्वारा एक प्रश्न के माध्यम से उठाया जा चुका है। कांग्रेस का नोटिस शून्यकाल में निर्धारित है। एआईयूडीएफ के नोटिस पर किसी अन्य तरीके से भी चर्चा की जा सकती है। मुझे नहीं लगता कि सदन की कार्यवाही स्थगित कर विपक्ष की मांग पर चर्चा की जाए। विस अध्यक्ष के इस बयान के बाद विपक्ष दल हंगामा करने लगे जिसके कारण अध्यक्ष को सदन कुछ देर के लिए स्थगित करना पड़ा। हालांकि लगभग 20 मिनट के बाद जब सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि सरकार सदन में मातृभाषा में शिक्षण के मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है यदि विषय को अन्य माध्यमों से उठाया जाता है। कांग्रेस पार्टी और गोगोई ने बाद में अपने स्थगन प्रस्तावों को वापस ले लिया। इस बीच एआईयूडीएफ विधायक अमीनुल इस्लाम ने कहा कि पार्टी के नोटिस को ध्यान में रखा जाना चाहिए क्योंकि यह मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित था। वहीं एआईयूडीएफ के विधायकों ने इस मुद्दे को सदन में उठाना जारी रखा और जब उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे सदन से वाकआउट किया।