गुवाहाटी : असम विधानसभा के शरद सत्र में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के लिए समय कम करने को लेकर मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने बुधवार को भी लगातार दूसरे दिन असम विधानसभा में अपनी मांग को रखी तथा विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनकी मांगों को अनदेखी करने के बाद कांग्रेस पार्टी ने सदन से वाकआउट किया। उल्लेखनीय है कि आज कांग्रेस पार्टी के साथ अन्य विपक्षी दल के विधायक भी उनके साथ शामिल हो गए और आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लोगों की समस्याओं के बारे में बोलने के लिए उनके लिए समय और साधन कम किया जा रहा है। जैसाकि सदन ने इस मुद्दे पर बार-बार शोर-शराबा देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की ओर से आज सदन में माना कि पूरक प्रश्नों की समय सीमा पर फिर से विचार किया जा सकता है, लेकिन विपक्षी दलों को अतिरिक्त समय नहीं दिया गया। मालूम हो कि प्रश्नकाल के दौरान प्रत्येक प्रश्न के लिए पूरक प्रश्नों के लिए पांच मिनट आवंटित करने के लिए सोमवार को विधानसभा की व्यावसायिक सलाहकार समिति (बीएसी)की बैठक में एक निर्णय ने सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों के बीच नवीनतम गतिरोध पैदा कर दिया है। पहले पूरक प्रश्नों की संख्या मुख्य प्रश्नकर्ता के अलावा दो विधायकों को अनुमति देने तक सीमित थी, लेकिन कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। प्रश्नकाल के दौरान जब स्पीकर विश्वजीत दैमारी ने पांच मिनट के नियम का हवाला देते हुए पूरक प्रश्नों की अनुमति नहीं दी तो कांग्रेस विधायकों ने विरोध में कुछ समय के लिए सदन से वाकआउट किया। सदन में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने सदन के बाहर कहा कि हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है। अगर ऐसा है तो हम घर पर बैठकर ऑनलाइन कार्यवाही देख सकते हैं। सैकिया ने कहा कि जन से जुड़े हर मुद्दों को विपक्ष इस दौरान उठाता ताकि सरकार उस तत्काल ठोस कदम उठा सके, लेकिन सत्तापक्ष की ओर से विपक्ष की आवाज को बंद करने की कोशिश की जा रही है। वहीं विधायक अशरफुल हुसैन ने कहा कि हमारी पार्टी के पास उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु थे, जो सदन के नियमों के भीतर हैं, लेकिन हमें अवसर नहीं दिया गया है। वहीं राइजर दल के विधायक अखिल गोगोई जिन्हें कार्यवाही में बाधा डालने के लिए प्रश्नकाल की अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था ने भी आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज को दबाई जा रही है। बाद में संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि यह निर्णय बीएसी की बैठक में लिया गया था। यदि आवश्यक हो तो अगली बैठक में एक बार फिर इस पर चर्चा हो सकती है।
सदन से किया वाकआउट