पर्यावरण बचाने के लिए हमें कोई बड़ा काम करने की जरूरत नहीं है। अगर हम छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखें तो प्रकृृति को बचा सकते हैं। जैसे कि अगर आप रोजना मीट खाते हैं, तो एक दिन मत खाइए। अगर हम हफ्ते में एक रोज मांस नहीं खाते हैं। तो साल भर में 30 दिन कार चलाने के बराबर कार्बन उत्सर्जन होने से रोक सकते हैं।
चलिए साइकिल से : गाडिय़ों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचाता है, यह हम सब जानते हैं। दिल्ली में इस प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ऑड-ईवन नियम भी शुरु किया था। सडक़ पर जितने ज्यादा वाहन चलेंगे पर्यावरण को उतना ही खतरा बढ़ जाएगा। अगर आप ड्राइव करने के बजाए साइकिल से चलते हैं, तो 250 ग्राम कार्बन उत्सर्जन प्रति किलोमीटर से बच सकते हैं।
कागज है सबसे बड़ा खतरा : आप जितना ज्यादा कागज का इस्तेमाल करते हैं, तो समझिए प्रकृृति को उतना ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। पेड़ कार्बन डाई ऑक्साइड को ऑक्सीजन में बदलता है। ऐसे में पेड़ काटकर कागज बनाए जाते हैं, ऐसे में हम चाहें तो कागज के बजाए ई-सर्विस का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कागज की जगह ई-टिकट इस्तेमाल करने से प्रोसेसिंग खर्च 650 रुपए से घटकर 65 रुपए आ जाएगा। इसलिए अबकी बार जब भी ऑफिस में कोई कागज बेवजह फेंकने से पहले जरा सोच लें।
ट्रैवल की जगह टेलीकम्यूटिंग का लें सहारा : बेवजह और अनुपयोगी सफर से बचें। अगर दो दिन ट्रैवल करने के बजाए टेलीकम्यूटिंग करते हैं, तो आधा टन कार्बन से बच सकते हैं। इसलिए जब बहुत ही आवश्यक हो, तभी सफर पर निकलें। नहीं तो सारे काम फोन से ही निपटा लें।
रेस्टोरेंट की जगह घर पर खाना खाएं : क्या आपको पता है, यदि आप घर पर खाना खाते हैं तो करीब 250 से ज्यादा प्रजातियों की जान बचा सकते हैं। क्योंकि बाहर डिनर या लंच पर जाते हैं, तो थोड़ा बहुत खाना बच जाता है। वही खाना पॉलीथिन में बांधकर नदियों में फेंक दिया जाता है। प्लॉस्टिक कचरा जलीय जीव-जंतुओं के लिए काफी हानिकारक होता है।