गुवाहाटीः उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारत की एक ऐसी पूंजी है जिस पर न तो कोई बातचीत की जा सकती है और न ही इस पर समझौता किया जा सकता है। गुवाहाटी के पांजाबाड़ी स्थित श्रीमंत कलाक्षेत्र के प्रांगण में एक सांस्कृतिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह  की ओर से पूर्वोत्तर के बौद्धिक मंच और असम पर्यटन विभाग के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय लोकमंथन सम्मेलन के तीसरे संस्करण ‘लोकमंथन 2022’ का यहां उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई बातचीत नहीं हो सकती है और हम इससे कभी समझौता नहीं कर सकते हैं। अगर  खिलाफ गुवाहाटी में आयोजित लोकमंथन के जरिए उनरको जबाव देने की जरूरत है। गुवाहाटी के श्रीमंत कलाक्षेत्र में प्रज्ञा प्रवाह के नेतृत्व में तथा असम पर्यटन विकास विभाग और स्थानीय इंटेलेख्ुअल फोरम के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय लोकमंथन सम्मेलन के तीसरे संस्करण में मुख्यमंत्री डा.हिमंत ने कहा कि भारतीय सभ्यता पर लगातार वामपंथियों और धर्मनिरपेक्ष के नाम पर हमले होते आ रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि ऐसे मानसिकता वाले लोगों के खिलाफ हमें भी जवाब देना होगा। मुख्यमंत्री शर्मा ने जोर देकर कहा कि गुवाहाटी में हो रहे लोकमंथन मंच से ऐसे लोगों को सामूहिक रूप से जवाब दिए जाने की जरूरत है।  शर्मा ने कहा कि हमारी सभ्यता के प्रति चुनौतियों के लिए हमें उन्हें (वामपंथी और धर्मनिरपेक्षतावादियों को) यह समझाना होगा कि भारत 1947 में अस्तित्व में आई एक भौगोलिक इकाई नहीं है। मैं हमेशा यही कहता हूं कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र नहीं है बल्कि सभ्यतागत लोकतंत्र है। भारत ने 1950 में अपना संविधान अपनाया था और 1951 में चुनावी लोकतंत्र अस्तित्व में आया था। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि प्राचीनकाल में भारत में लोकतंत्र मौजूद था। हालांकि शर्मा ने  यह नहीं बताया कि सभ्यतागत लोकतंत्र से उनका क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में जिन विषयों पर चर्चा होगी उससे देश और मजबूत होगा। भारतीय सभ्यता और संस्कृृति का संदेश देश के हर कोने कोने तक पहुंचेगा। हमें अपनी सभ्यता व संस्कृृति को विकास करने के लिए बढ़ावा देना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्षों बाद देश को ऐसा प्रधानमंत्री मोदी के रूप में मिला है जिनके नेतृत्व में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृृति की सुरक्षा व विकास की दिशा में मजबूती से काम हो रहा है। इस दिशा में काम करने के बाद भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता है। मुख्यमंत्री हिमंत ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव की हर रचना में असम को भारत से जोड़ने का बात उल्लेख है। उन्होंने भारतीय सभ्यता से असम को भी जोड़ कर रखा और असम के लोगों को विभिन्न तरीके से जागरूक किए। उन्होंने कहा कि असम के लोग हमेश अपने आतिथियों के सम्मान के लिए जाना जाता है और इस कार्यक्रम के जरिए असम को देश हर कोने से आए अतिथियों का स्वागत करने का अवसर मिला है उसमें किसी प्रकार की कमी नहीं होगी।