गुवाहाटी : भारतवर्ष के कण-कण में लोक हित निहित है। भारतीय सभ्यता का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यहां जैसा व्यवहार आपके लिए पीड़ादायक है,आप वैसा व्यवहार दूसरे के लिए न करें। भारतीयों के आदर्श ऋषि-मुनि रहे हैं, कोई नेता नहीं रहा है। हालांकि कुछ राजाओं ने भी भारतीय संस्कृृति को आगे बढ़ाने का काम किया। ऐसा कहना है केरल के राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान का। उन्होंने उपरोक्त आशय की बातें आज गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के प्रेक्षागृह में चार दिवसीय लोकमंथन-2022 के चौथे एवं अंतिम दिन आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। मौके उपस्थित लोगों को संबाधित करते हुए राज्यपाल खान ने कहा कि भारत के ऋषि-मुनियों ने भारतीय सभ्यता और संस्कृृति को आगे बढ़ाया, जिसके कारण ही हमेशा से हर भारतीयों के लिए ऋषि-मुनि उनके आदर्श रहे हैं। इमारतें खत्म हो जाएंगी,लेकिन रामायण, महाभारत और ऋषियों के ग्रंथों के संदेश कभी खत्म नहीं होंगे। गीता, पुराण, वेद और उपनिषद भारत की सभ्यता व संस्कृृति की धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ज्ञान और प्रज्ञा के संवर्द्धन के लिए जानी जाती है। ज्ञान प्राप्त करना और उसे दूसरे के साथ साझा करना ही तप है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा करते हुए कहा कि मैं नागपुर में एक कार्यक्रम के बाद संघ के मुख्यालय में गया और मेरे मन जो आशंकाएं थीं,उसके बारे में वहां जानकारी हासिल की। संघ के कार्यक्रमों ं के बारे में नजदीकी से जानकारी लेने के बाद हम कह सकते हैं संघ के लिए पहले देश है, उसके बाद संघ है। राज्यपाल खान ने एकल विद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि आरएसएस देश भक्ति के साथ ही उस पाप का भी प्राश्यचित कर रहा है जो उसने नहीं किया। आजादी के इतने वर्षों के बाद भी वनवासियों के बच्चों तक शिक्षा की रोशनी नहीं पहुंची,लेकिन संघ एकल विद्यालय के माध्यम से पूरे देश में व्यापाक पैमाने पर वनवासियों को शिक्षित करने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमेशा से अरब तथा अन्य देश भारत से ज्ञान व प्रज्ञा की बातें सिखते आए हंै। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी हथियार में विश्वास नहीं किया,पहले ज्ञान से लोगों को समझाने का प्रयास किया,लेकिन जब नहीं समझे तो अपनी रक्षा में हथियार भी उठाया और उठाना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के वहीं राजनेता लोगों में लोकप्रिय होते हैं जिन्होंने भारतीय सभ्यता व संस्कृृति को नए आयाम के साथ विकसित किया। उन्होंने असम की संस्कृृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि दक्षिण भारत और असम में महिलाओं को अधिक क्षमतावान होने की परंपरा रही है और यह यहां आने के बाद महसूस भी किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस)के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और उसे गतिमान रखने के लिए जो लोग प्रयास कर रहे हैं,उन्हें लोकमंथन से जुड़ना चाहिए। लोकमंथन के कार्यक्रमों में जीवन से जुड़ी कई चीजों पर गहन चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि भूमि, जन और संस्कृति से राष्ट्र का निर्माण होता है। सभ्यता और संस्कृति लोक के कारण ही जीवित रहा है। लोक परंपरा में विविधता कभी आड़े नहीं आती। उन्होंने कहा कि हमें आने वाली पीढ़ी को भारतीय लोक संस्कार व संस्कृृति के बारे जानकारी देनी होगी। इससे पहले डा.मल्लिका कंदली की टीम ने असमिया में भारत वंदना की प्रस्तुति दी। कलाकारों को सम्मानित किया गया। इस दौरान दो पुस्तकों और एक जर्नल का विमोचन किया गया। श्रीकांत ने लोकमंथन के उद्देश्य एवं कार्य-कलापों की विस्तृत जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि आज सुबह में विभिन्न राज्यों सहित असम की जनजातियों की वैवाहिक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। इस दौरान लोक परंपरा में संस्कार और कर्त्तव्य की भावना भारतीय समाज में औद्योगिक जातियों के संदर्भ सहित विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
भारतीयों के आदर्श रहे हैं ऋषि व मुनि : आरिफ मोहम्मद खान