वाशिंगटन: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में तेजी से भारत काफी चिंतित है और यह हमारी कमर तोड़ रही है। अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ द्विपक्षीय बातचीत के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने मंगलवार को कहा कि विकासशील देशों में ऊर्जा जरूरतों के समाधान को लेकर काफी चिंता है। यूक्रेन युद्ध के बारे में उन्होंने कहा कि हमने निजी तौर पर, सार्वजनिक रूप से और लगातार यह कहा है कि यह झड़प किसी के हित में नहीं है। मामले के समाधान का बेहतर तरीका बातचीत और कूटनीति है। रूस से आने वाले तेल की कीमत सीमा तय किए जाने की जी-7 देशों की पहल के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा कि हम तेल के दाम को लेकर काफी चिंतित हैं। हमारी अर्थव्यवस्था का आकार 2,000 डॉलर प्रति व्यक्ति है, लेकिन जब तेल की कीमत हमारी कमर तोड़ रही है, तब यह हमारे लिए बड़ी चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि कीमत सीमा के बारे में हमारी सुबह में बातचीत हुई है। इस विषय पर विशेषज्ञ लोग काम कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से ऊर्जा बाजार काफी दबाव में हैं। वैश्विक स्तर पर विकासशील और अल्पविकसित देशों के लिए न केवल बढ़ती कीमतों को लेकर बल्कि उपलब्धता के मामले में भी सीमित ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो गया है। जयशंकर ने कहा कि अभी हमारी चिंता यह है कि ऊर्जा बाजार पहले से ही दबाव में है, यह कम होना चाहिए। हम किसी भी स्थिति का स्पष्ट रूप से मूल्यांकन करेंगे कि यह वैश्विक स्तर पर दक्षिण (विकासशील और अल्पविकसित देश) में हमें और अन्य देशों को कैसे प्रभावित करता है। विकासशील देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत के समाधान को लेकर काफी चिंता है। भारत का रूस से तेल आयात अप्रैल से 50 गुना से अधिक बढ़ा है और अब विदेशों से लिए जाने वाले कुल तेल में इसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत हो गयी है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत के आयातित तेल में रूस की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत थी। विकसित देश यूक्रेन पर हमले के बाद धीरे-धीरे रूस से ऊर्जा खरीद कम कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से रूस पर बहुत कम प्रभाव पड़ा है। इसको देखते हुए जी -7 देशों और यूरोपीय संघ ने रूस के राजस्व को सीमित करने के लिए वहां के कच्चे तेल और परिष्कृत उत्पादों के लिए मूल्य सीमा तय करने का प्रस्ताव किया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से तेल कीमतों में तेजी तोड़ रही है भारत की कमर : जयशंकर