मुंबई: भारतीयों की बचत दर पिछले पांच साल में घट कर सबसे निचले स्तर पर आ गई है। यह आंकड़ा 31 मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष का है। इसकी वजह यह बताई गई है कि एक तरफ भारतीयों ने कोविड महामारी के बाद जबरदस्त खरीदारी की वहीं, दूसरी तरफ महंगाई ने उनकी क्रय क्षमता पर असर डाला। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022 में घरेलू वित्तीय बचत भारत की जीडीपी के 10.8 फीसदी के बराबर रही, यह वित्त वर्ष 2021 की तुलना में 15.9 फीसदी और उससे पहले के तीन वित्त वर्ष के मुकाबले 12 फीसदी की गिरावट है। गौरतलब है इस दौरान जीडीपी में तेज गिरावट दर्ज हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि कम आय वाले लोगों पर जब महंगाई तेज असर डालेगी तो ये परिवार आय घटने से अपनी खरीदारी पर लगाम लगाएंगे। महामारी के शुरुआती समय में काफी सारे लोगों ने अपनी बचत में इजाफा किया, क्योंकि वे अपनी सेहत, नौकरी पर कोविड-19 के असर को लेकर चिंतित थे, लेकिन महामारी का असर धीमा होते ही वे अपनी खरीदारी पर खुद की लगाई बंदिशों को तोडऩे लगे। इसे विशेषज्ञ रिवेंज शॉपिंग का नाम देते हैं। इस वक्त बचत ज्यादा थी, लेकिन आय में इजाफा नहीं हो रहा था। घरेलू बचत की दर कोविड-19 के शुरुआती दौर यानी 2020-21 की जून तिमाही में जीडीपी के 21 फीसदी तक पहुंच गई थी, क्योंकि लॉकडाउन के चलते लोगों के पास खरीदारी करने का विकल्प ही नहीं उपलब्ध था। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं इसके बाद जो मांग में उछाल आया वह क्रम अब तक जारी है। लोगों की आय में इजाफा नहीं हुआ और रोजगार सृजन में भी तेजी नहीं आई, लेकिन खरीदारी का क्रम जोर-शोर से जारी है। मदन सबनवीस के मुताबिक, महंगाई और तेजी से बढ़ती मांग ने बेहिसाब खपत में योगदान किया जिससे लोगों की बचत की क्षमता कम हुई। यही नहीं बैंकिंग प्रणाली में डाली गई अतिरिक्त तरलता के चलते ब्याज दरों में कमी आई। इससे जमा दरों पर असर हुआ। फरवरी 2020 में बैंकों में बकाया जमा की औसत दर जहां 6.45 फीसदी थी, वह इस साल मई में 5.07 प्रतिशत पर आ गई और जुलाई में मामूली रूप से बढक़र 5.22 फीसदी पर पहुंची है। घरेलू बचत के आंकड़ों में छोटे और लघु उद्यम भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मुद्रास्फीति को मापने वाला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक अप्रैल में 7.8 फीसदी का शिखर छूने के बाद जुलाई में थोड़ा नरम पड़ा, लेकिन अगस्त में इसने फिर ऊपर की राह पकड़ ली। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसिज के विशेषज्ञों के मुताबिक अक्तूबर में भी इसके आरबीआई के लक्ष्य से ऊपर ही रहने का अंदेशा है। घरेलू बचत में बैंक और गैर-बैंक जमा, जीवन बीमा फंड, भविष्य निधि और पेंशन फंड, नगदी, निवेश और छोटी बचत शामिल हैं। जानकार बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2022 की तिमाही में जहां जमा का हिस्सा 27.2 फीसदी रहा यानी यह पिछले 50 साल का दूसरा निचला स्तर है। वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि बीमा, भविष्य निधि और पेंशन फंड में निवेश 40 फीसदी बढ़ गया है। जोखिम वाले निवेश जैसे शेयर और डिबेंचर में निवेश पांच साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।