दस महाविद्या अर्थात महान विधा रूपी   देवी।  महाविधा, देवी मां पार्वती के दस रूप है। जो कि अधिकांश तांत्रिक साधकों द्वारा पूजे जाते हैं। इन दस महाविद्याओं में अष्टम अर्थात आठवीं महाविधा श्री कुल की देवी भगवती बगलामुखी जिन्हें पीताम्बरा कहा जाता है। वे पीतवर्णा अर्थात पीले रंग से सुशोभित है। भगवती बगलामुखी अष्टम ब्रह्मास्त्र महाविधा हैं। देवी की पूजा शत्रु स्तम्भन के लिए जाती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवती बगलामुखी मंगल ग्रह की अधिस्ठात्री देवी है तथा दक्षिण दिशा पर  इनका आधिपत्य है। मां का आविर्भाव रात्रि 11 बजे से 2 बजे तक रहता है। इस समय विशेष रूप से  मां की पूजा साधना का समय रहता है। भगवती पीताम्बरा सत्ता राजयोग प्रदान करने वाली है। इसीलिए चुनाव के दौरान प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी को हराने के लिए माई की विशेष पूजा अर्चना एवं अनुष्ठान करवाते हैं।  भगवती बगलामुखी सुधा समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय मंडप में रत्नवेदी सोने की सिंहासन पर विराजमान रहती हैं। पीतवर्णा होने के कारण मां सदैव पीले वस्त्र एवं पीले आभूषणों से सुसज्जित रहती है। देवी को पीला रंग अत्यंत प्रिय हैं। इनके एक हाथ में शत्रु की जिह्वा और एक हाथ में मुद्गर है।  श्री बगला महाविधा ऊध्र्वाम्नाय के अनुसार ही उपास्य हैं, जिसमे स्त्री (शक्ति) भोग्या नहीं बल्कि पूज्या है। भगवती बगलामुखी की उपासना अत्यंत सावधानी पूर्वक गुरु दीक्षा उपरांत एवं गुरु मागर्दर्शन में करनी चाहिए। बगला शक्ति अत्यंत तेजपूर्ण शक्ति है, जिनका उद्भव ही स्तंभन हेतु हुआ था। इस विधा के प्रभाव से ही महर्षि च्यवन ने इंद्र के वज्र को स्तम्भित कर दिया था। महामुनि श्री निम्बार्क ने कस्सी ब्राह्मण को इसी विधा के प्रभाव से नीम के वृक्ष पर सूर्य देव का दर्शन करवाया था।  शत्रुओं का दमन और विध्नों का शमन करने में विश्व में इनके समकक्ष कोई अन्य देवता नही हैं। 

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