हिन्दू सनातन धर्म में पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करके व्रत-उपवास रखने की विशेष महिमा है। भारतीय सनातन धर्म में कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ (करक चतुर्थी) का व्रत रखा जाता है। विशिष्ट कामना की पूर्ति के लिए सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत करती हैं। यह व्रत हर्ष, उल्लास व उमंग के साथ अपने पति की दीर्घायु के लिए रखा जाता है। प्रख्यात ज्योतिषविद् विमल जैन ने बताया कि इस बार यह व्रत गुरुवार, 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। करवा चौथ की पूजा चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि में की जाती है।कार्तिक कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि बुधवार, 12 अक्तूबर  को अद्र्धरात्रि के पश्चात 2 बजकर 00 मिनट पर लगेगी जो कि अगले दिन गुरुवार, 13 अक्तूबर को अद्र्धरात्रि के पश्चात 3 बजकर 09 मिनट तक रहेगी। करक चतुर्थी (करवा चौथ) का व्रत गुरुवार, 13 अक्तूबर को रखा जाएगा। चंद्रोदय रात्रि 7 बजकर 55 मिनट पर होगा।

व्रत रखने का विधान : विमल जैन ने बताया कि सुहागिन व्रती महिलाएं प्रात:काल अपने समस्त दैनिक कृत्यों से निवृत्त होकर अपने देवी-देवता की आराधना के पश्चात् करवाचौथ के व्रत का संकल्प लेती हैं, जिससे उनका अखंड सौभाग्य बना रहे साथ ही यश-मान, प्रतिष्ठा, सुख-समृद्धि, खुशहाली से वंचित न रहें। मुख्यत: पति की लंबी आयु के लिए ही करवा चौथ के व्रत का विधान शास्ïत्रों में बताया गया है। यह व्रत निराहार व निराजल रहते हुए किया जाता है।   

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