नरपत सिंह राजपुरोहित पर्यावरण और प्रकृृति प्रेमी हैं। वे साइकिल से अब तक 29 हजार किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुके हैं। नरपत राजस्थान के बाड़मेर जनपद के रहने वाले हैं। वह पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए साइकिलिंग का विश्व रिकार्ड बनाना चाहते हैं। घुटनों में 38 टांके लगे होने के बावजूद नरपत के हौसले बुलंद हैं। नरपत न सिर्फ लोगों को अपनी यात्राओं में पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हैं बल्कि दो पेड़ भी उपहार में देते हैं और उसे रोपने को प्रेरित करते हैं। नरपत अबतक एक लाख पौधे भी रोप चुके हैं। बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी से प्रयागराज पहुंचे नरपत सिंह का कहना है कि अगर कोई अपने जीवन में दो पौधे नहीं रोप सकता तो चिता का भी अधिकार नहीं मिलना चाहिए। वो सवाल करते हैं कि देश में रोज कितने पेड़ काटे जा रहे हैं। क्या उतने पेड़ लग भी रहे हैं। हम आजीवन प्रकृृति से शुद्ध हवा और आक्सीजन मुफ्त में लेते हैं। मरने के बाद भी में दाह संस्कार के लिए लकड़ियां चाहिए होती हैं। अगर लोग सिर्फ पेड़ काटेंगे रोपेंगे नहीं तों प्रकृृति कैसे संरक्षित रहेगी। नरपत सिंह का कहना है कि वो ज्यादातर ऐसे रूट चुनते हैं जहां से गांव और कस्बे मिलें। वहां रुककर लोगों को खासतौर पर युवाओं को पर्यावरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं। कम से कम दो पौधे रोपने को जरूर कहते हैं। इसके बाद उनके संरक्षण की कसम भी दिलवाते हैं। नरपत ने जंगली शिकारियों को पकड़ने, दहेज प्रथा को खत्म के लिए भी जागरूकता अभियान चलाया है। दहेज प्रथा के खिलाफ सबसे पहली मुहिम नरपत सिंह ने सबसे पहले अपने घर से शुरू की थी। अपनी छोटी बहन की शादी में उन्होंनें दहेज के बदले केवल 251 पौधे भेंट किए थे। बारातियों का स्वागत भी पौधे देकर ही किया था। बहन के गांव में हर घर में दो-दो पौधे भेंट दिए थे। नरपत सिंह का कहना है कि उनका पर्यावरण संरक्षण की मुहिम अंतिम सांस तक जारी रहेगी। नरपत सिंह राजस्थान के ऐसे गांव से हैं जहां हर घर की औरते 5 से 6 किलोमीटर पैदल चलकर पानी भरने जाती हैं। खुद उनकी मां के सामने भी यही समस्या है। लंगेरा में लोग कपड़े धोने के बाद बचने वाले पानी का दोबारा मजबूरी में उपयोग करते हैं। नरपत ने बताया कि बचपन में पढ़ाई के दौरान शिक्षक ने टॉफी के बदले पौधे लगाने का अभियान चलाया था। इस टॉफी को पाने के लिए नरपत ने स्कूल में दर्जनों पौधे लगाए। इस दौरान ही मेरे बाल मन में पर्यावरण संरक्षण का बीज हमारे शिक्षक ने मेरे मन में बो दिया था।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए साइकिल से नाप दी 29 हजार किलोमीटर की दूरी