डिजिटल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने आज देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदभार ग्रहण किया। बुधवार सुबह राष्ट्रपति भवन में हुए कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चंद्रचूड़ को प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ग्रहण कराई। उन्होंने सीजेआई यूयू ललित की जगह ली है, जो आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे पहले छह नवंबर को सीजेआई यूयू ललित को औपचारिक सेरेमोनियल बेंच गठित कर विदाई दी गई थी। शपथ ग्रहण के बाद सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, देश की सेवा करना मेरी प्राथमिकता है। हम भारत के सभी नागरिकों के हितों की रक्षा करेंगे। चाहे वह तकनीक हो, रजिस्ट्री सुधार हो या न्यायिक सुधारों के मामले में हों। अयोध्या भूमि विवाद, धारा 377 और सबरीमाला,जैसे अहम फैसलों का हिस्सा रहे डीवाई चंद्रचूड़। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने 1998 से 2000 तक भारत के लिए एक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य किया। उन्हें 1998 में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था और कई महत्वपूर्ण मामलों में जनहित याचिका, बंधुआ महिला श्रमिकों के अधिकार, कार्यस्थल में एचआईवी पॉजिटिव श्रमिकों के अधिकार शामिल थे। ठेका श्रमिक और धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकार।उन्हें बॉम्बे समुद्र तटों की स्थिति पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया गया था। न्यायाधीश ने 1983 में ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय, यूएसए में अंतर्राष्ट्रीय कानून पढ़ाया और 1988 से 1997 तक बॉम्बे विश्वविद्यालय में तुलनात्मक संवैधानिक कानून के विजिटिंग प्रोफेसर थे। वह एलएलएम के लिए पेपर सेटर और बोर्ड ऑफ एक्जामिनर्स के अध्यक्ष थे।