बीआरडी मेडिकल कालेज के नेत्र रोग विभाग में अध्ययनरत डॉ.दीप्ति वाही हों या सर्जरी विभाग में पढ़ाई कर रहे डॉ. सुनील आदि सैकड़ों छात्र पढ़ाई के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की कहानी भी लिख रहे हैं। वे रोगियों को देखने के लिए अस्पताल जाने के पहले पौधों को पानी जरूर देते हैं। लौटने पर पुनः उसकी देखभाल करते हैं। यह उनकी दिनचर्या में शामिल है। छात्र केवल उपचार में ही दक्ष न हों, वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी सचेत रहें, इसलिए कालेज प्रबंधन ने पढ़ाई के साथ पौधारोपण व उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी छात्रों को दी है। इसकी नियमित निगरानी होती है। इसके लिए ईएनटी विभाग के डॉ. पीएन सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मेडिकल कालेज प्रबंधन ने 2014 से पौधारोपण को कालेज की गतिविधियों का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है। हर रविवार को कालेज में पौधारोपण किया जाता है। इसमें शिक्षक, कर्मचारी व छात्र शामिल होते हैं। इसका मूल उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। हर छात्र-छात्रा को कुछ पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी दी जाती है। यदि पौधा सूख गया तो वहां दूसरा पौधा लगाकर नोडल अधिकारी को इसकी सूचना देनी होती है। इसलिए छात्र कालेज में पढ़ने या अस्पताल में रोगियों को देखने जाने से पहले पौधों को पानी देते हैं। वापस आने पर भी उनकी देखभाल करते हैं। पौधे वन विभाग निःशुल्क देता है। अब तक लगभग पांच हजार पौधे बचा लिए गए हैं। 2014 से अब तक कुल लगभग 15 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें से कई सूख गए, उनकी जगह पर पुनः पौधे लगाए गए। इस तरह वातावरण हरा-भरा हो गया है। बीआरडी मेडिकल कालेज के पौधारोपण अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. पीएन सिंह ने बताया कि बच्चों को पौधारोपण के लिए ही नहीं, उन्हें बचाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। इसलिए हर छात्र-छात्रा को कुछ पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी दी गई है। यदि पौधा सूखता है तो वे उसकी सूचना देते हैं। वहां लगाने के लिए दूसरा पौधा प्रदान कर दिया जाता है।  बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि पढ़ाई के साथ ही बच्चों में पर्यावरण संरक्षण का भी संस्कार पड़े, इसलिए पौधारोपण अभियान शुरू किया गया है। अब तक पांच हजार से अधिक पौधे बचाए जा चुके हैं। सड़कों व डिवाइडर पर तो पौधे लगाए ही गए, फार्मेसी कालेज में आरोग्य वाटिका भी बनाई गई है।