कीव : क्या खेरसॉन इलाके से रूसी फौज की वापसी के बाद अब यूक्रे न मसले का बातचीत के हल निकलने की संभावना बन रही है? कूटनीतिक हलकों में ये सवाल काफी चर्चित है। रूस को लेकर पश्चिमी रणनीतिक विश्लेषकों तक ने कहा है कि ऐसा होने के संकेत अब मजबूत हुए हैं। बीते सितंबर में रूस ने यूक्रेन के दोनाबास इलाके में मौजूद दोनेत्स्क और लुहांस्क गणराज्यों को अपने में मिला लिया था। इसके तहत जो क्षेत्र रूस का हिस्सा बना लिए गए, उनमें खेरसॉन और जेपोरिझझिया भी शामिल थे। तब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमीर जेलेंस्की ने उस रूसी कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। उन्होंने एक ऐसा आदेश जारी कर दिया था, जिसके  तहत रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सरकार से किसी प्रकार की वार्ता को अवैध घोषित कर दिया गया। तब जेलेंस्की ने कहा था- यूक्रेन रूस से बातचीत के लिए तैयार होगा, लेकिन वार्ता किसी अन्य रूसी राष्ट्रपति के साथ ही होगी। अमरीकी रणनीतिक वेबसाइट रेस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक जेलेंसकी के उस आदेश से अमरीका के लिए असहज स्थिति पैदा हुई। अमरीका का आकलन है कि पुतिन की सत्ता निकट भविष्य में खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए पुतिन प्रशासन से बातचीत की संभावना को ठुकरा देना वाजिब नहीं होगा। खास कर उस समय जबकि यूरोप में यूक्रेन को मदद जारी रखने के सवाल पर सब्र टूट रहा है। अमरीकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका ने तब जेलेंस्की से साफ कहा था कि वे रूस से बातचीत के लिए लगाई शर्त को छोड़ दें और पुतिन प्रशासन से संवाद कायम करने की कोशिश करें। खबरों के अनुसार इसके लिए अमरीका ने जेलेंस्की पर लगातार दबाव बनाया। इसी सिलसिले में अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान ने यूक्रेन की राजधानी कीव की यात्रा की। इस बीच ऐसी कई खबरें पश्चिमी मीडिया में आई हैं कि सुलिवान लगातार रूसी राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव और रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव के साथ संपर्क में हैं। बीते आठ नवंबर को जेलेंस्की के रुख में नाटकीय बदलाव दिखा। उन्होंने कहा कि उनकी शर्तें पूरी की जाएं, तो वे पुतिन प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उनकी नई शर्तों में शामिल हैं- यूक्रेन के इलाके उसे लौटाना, यूक्रेन को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति, हर कथित युद्ध अपराधी को सजा देना और यह गारंटी कि रूस फिर कभी यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा। इसके बाद अमरीकी अधिकारियों ने मीडिया से कहा- हम यह नहीं कह रहे हैं कि जेलेंस्की तुरंत बातचीत शुरू कर दें। हमारी समझ में रूस की गतिविधियों को देखते हुए अभी इसके लिए उचित समय नहीं है। लेकिन रेस्पॉन्सिबल स्टेटक्राफ्ट के विश्लेषण में कहा गया है कि जेलेंस्की की शर्तें और अमरीका का बयान जनमत को शांत करने के लिए हैं। इस विश्लेषण में ध्यान दिलाया गया है कि रूसी फौज खेरसॉन से लौट रही है, इस खबर की पहली पुष्टि नौ नवंबर को हुई। इससे जेलेंस्की को अपनी जीत दिखाने का मौका मिलेगा। इससे रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत शुरू होने की संभावना बन सकती है।