गुवाहाटी : बोड़ोलैंड में पिछले संसदीय चुनाव से पहले भाजपा और बीपीएफ ने अपना गठबंधन तोड़ लिया था। भाजपा ने अपने पुराने सहयोगी बीपीएफ को छोड़कर प्रमोद बोड़ो और उनके यूपीपीएल का स्वागत किया था। हग्रामा महिलारी के नेतृत्व वाली बीपीएफ परिषदीय चुनाव हार गई और भाजपा-यूपीपीएल ने बोड़ोलैंड में एक संयुक्त सरकार बनाई। हार के बाद उनकी पार्टी के कई नेताओं ने हग्रामा महिलारी का साथ छोड़कर भाजापा की शरण ले ली। सत्ता से बाहर होने के बाद हग्रामा महिलारी बोड़ोलैंड की राजनीति में लगभग अनुपयोगी हो गए।  हग्रामा महिलारी विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस गठबंधन में शामिल हो गए, लेकिन बाद में रणनीतिक कारणों से गठबंधन छोड़ दिया। बीपीएफ ने उपचुनाव के दौरान खुद दौराकर भाजपा की मदद की थी। बीपीएफ ने विधानसभा में भाजपा के सहयोगी के रूप में काम जारी रखने के एकतरफा फैसले की भी घोषणा की थी। हग्रामा ने गठबंधन का प्रस्ताव देने के लिए अपने पुराने राजनीतिक मित्र मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से भी संपर्क किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। लेकिन भाजपा या मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने फिर से गठबंधन में दिलचस्पी नहीं दिखाई। लेकिन हग्रामा मोहिलारी ने कोशिश करना नहीं छोड़ा। बीपीएफ ने राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनाव में भी भाजपा का समर्थन किया और भाजपा से बार-बार गठबंधन की पेशकश की, लेकिन भाजपा ने इसे स्वीकार नहीं किया। हग्रामा महिलारी के अस्तित्व की लड़ाई के बीच भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा और यूपीपीएल के बीच गठबंधन जारी रहेगा। मुख्यमंत्री शर्मा या राज्य भाजपा के साथ गठबंधन से हट जाने के बाद हग्रामा महिलारी ने आरएसएस और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की शरण लेने की कोशिश की। इसी कड़ी में हग्रामा महिलारी ने पिछले एक महीने से नई दिल्ली में आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभियान अभी तक सफल नहीं हुआ है। हग्रामा महिलारी आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार से मिल चुके हैं और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी मांग चुके हैं। उन्होंने आरएसएस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार से भी मुलाकात की। हग्रामा ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन सचिव बीएल संतोष से मुलाकात की और गठबंधन का प्रस्ताव रखा। वे फिलहाल नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल से भी हग्रामा की मुलाकात नहीं हो सकी है। हाग्रामा को अब केवल भाजपा के आशीर्वाद और राजनीतिक प्रतिष्ठा की जरूरत है। उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं से तो मुलाकात की है लेकिन अब तक पार्टी के किसी बड़े नेता से मिल नहीं पा रहे हैं। हालांकि हग्रामा दिल्ली में आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक का भी इंतजार कर रहे हैं और इधर सीएम ने कोकराझाड़ में हाल ही में संपन्न यूपीपीएल सत्र में यह स्पष्ट कर दिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव भाजपा और यूपीपीएल मिलकर लड़ेंगे और कोकराझाड़ सीट सहयोगी यूपीपीएल को दी जाएगी।