प्रदूषण एक तरह का धीमा जहर है, जो हवा, पानी, धूल के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर हमें बीमार बना देता है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कुछ अच्छी आदतों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप भी पर्यावरण को बचाने में अपना सहयोग दे सकते हैं।
अलग रखें गीला और सूखा कूड़ाः पुराने जमाने में किचेन का सारा कूड़ा यानी सब्जियों के छिलके आदि जानवरों को खिला दिए जाते थे। लेकिन अब इस और ध्यान नहीं दिया जाता। लिहाजा घर में मौजूद गीले और सूखे कचड़े को अलग-अलग रखने की आदत डालें।
बंद करें प्लास्टिक का इस्तेमालः प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद न कर पाएं तो उसे रीयूज करें। मसलन खाने का कोई कंटेनर प्लास्टिक का आया तो उससे छोटा प्लांट पॉट बनाकर उसमें जेड या एलोवेरा प्लांट लगा सकती हैं। प्लास्टिक की स्ट्रॉ के बजाय पेपर स्ट्रॉ का उपयोग करें। दूध का पैकेट थोड़ा सा काटकर नहीं पूरा काटकर फेंके। बारीक या छोटा काटने से वो रीसाइकल नहीं हो पाता। आटे की थैलियों को फेंकने के बजाय मैट के नीचे बिछा सकते हैं या वॉशिंग मशीन का कवर बना सकते हैं।
पानी की हर बूंद बचाएंः साफ और ताजा पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी है लिहाजा इसकी हर एक बूंद बचाना सीखें। नदियों से लेकर जल के दूसरे प्रमुख स्रोतों जैसे झील, तालाब और मौसमी नदियों में साबुन, पॉलीथीन, कूड़ा कचरा, प्लास्टिक बोतलें, पूजा के फूल न बहाएं। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें जैसे- ब्रश करते समय नल खुला न छोड़ें। सार्वजनिक नलों को बहते देखें तो नल बंद करने की जहमत उठाएं। टंकी बहने न दें।
पार्टी में चलाएं स्टील के बर्तनः सिंगल यूज डिस्पोजेबल या थर्माकोल / स्टायरोफोम के बने हुए डिस्पोजेबल हमारे शरीर व पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदेह हैं। ये ऐसी चीजें है जो हजारों साल बाद भी पर्यावरण में मौजूद रहती हैं। इससे बचने के लिए शादी पार्टी में प्लास्टिक के या डिस्पोजेबल बर्तन मंगवाने की बजाए स्टील की क्रॉकरी का इस्तेमाल करें।
बिजली का उपयोग कम करेंः दिन में सूर्य की रोशनी में काम करने की कोशिश करें। जब बिजली की ज़रूरत न हो तो बिजली का स्विच बंद कर दें। लैपटॉप/ मोबाईल चार्जर्स को चार्ज करते समय उन्हें बंद कर दें। एलईडी या सीएफएल बल्ब का इस्तेमाल करें। टीवी देखते देखते आंख लग जाती है तो उसमें टाइमर लगा दें ताकि वह अपने आप बंद हो जाए।
टॉइलेट पेपर का कम इस्तेमालः पर्यावरण को बचाने में योगदान देना है तो टॉइलेट पेपर का इस्तेमाल भी सीमित करें। इसके लिए स्प्रेयर वाली सीट का यूज किया जाना चाहिए।