गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित समारोह में सत्र की भूमि समस्याओं की समीक्षा एवं आकलन के लिए आयोग की अंतरिम रिपोर्ट प्राप्त की। गौरतलब है कि पिछले साल एक कैबिनेट प्रस्ताव के अनुसार एक 3 सदस्यीय आयोग का गठन  किया गया था, जिसमें आमगुड़ी विधान सभा सदस्य (विधायक) प्रदीप हजारिका अध्यक्ष और विधायक रूपक शर्मा और मृणाल सैकिया सदस्य थे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने 3 सदस्यीय आयोग को उनके सामने आने वाली कई चुनौतियों के बावजूद उन्हें सौंपे गए काम को सावधानीपूर्वक पूरा करने के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि आज सौंपी गई अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार राज्य के विभिन्न हिस्सों में स्थित 303 सत्रों (वैष्णव मठों) में कुल 7,504 बीघा (1,898 हेक्टेयर) भूमि पर अतिक्रमण है। रिपोर्ट के अनुसार बरपेटा जिले में अतिक्रमण के तहत सबसे बड़ी सत्र भूमि है और इसके बाद लखीमपुर और नगांव जिले का स्थान आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाईगांव और धुबड़ी जिलों में सत्रों की भूमि पर भी अत्यधिक अतिक्रमण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोग का गठन सत्रों की भूमि पर अतिक्रमण के मुद्दे को हल करने का अपनी तरह का पहला प्रयास है। उन्होंने कहा कि अंतरिम रिपोर्ट की अब प्रशासनिक रूप से समीक्षा की जाएगी और इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आयोग अंतिम रिपोर्ट जमा करने तक उसी उत्साह और समर्पण के साथ काम करना जारी रखेगा। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव और राज्यसभा सांसद पवित्र मार्घेरिटा भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।