नई दिल्ली : अब चीन की निगरानी के लिए एलएसी पर इस बाज की तैनाती होनी है। यूरेशियन टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारतीय सेना के ट्रेंड बाज अर्जुन के सिर में कैमरा और शरीर में जीपीएस लगाया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि चीनी सीमा की निगरानी के लिए तैनात किए जाने वाले इस बाज के सिर पर एक चीनी कंपनी का कैमरा लगाया गया है। सैन्य अधिकारियों ने बताया- मेरठ के रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स ने इसे ट्रेनिंग दी है। ये बाज दुश्मन ड्रोन को गिराने के अलावा अपने सिर में लगे कैमरे के जरिए दुश्मन देशों के आसमान और जमीन की हर गतिविधियों की निगरानी करने में भी सक्षम है। उड़ान भरते हुए बाज की सही लोकेशन पता करने के लिए उसके शरीर में जीपीएस लगाया गया है। सितंबर 2022 में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने नए एफ-35 जेट्स की सप्लाई पर रोक लगा दी। दावा किया कि लड़ाकू विमान के इंजन में इस्तेमाल किए गए चुंबक को बिना मंजूरी के चीन से आयात किए गए मटेरियल से बनाया गया था। इसके बाद इसे  चोरी-छिपे अमरीका के सबसे एडवांस फाइटर जेट में लगा दिया गया। यही वजह है कि खुफिया निगरानी के डर से अमेरिका ने इस पर पाबंदी लगाने का फैसला किया। सिर्फ एक महीने बाद अमेरिका ने ये पाबंदी हटाते हुए कहा कि इसके जरिए कोई सूचना शेयर नहीं की गई है। इससे साफ हो गया कि अमेरिका भी चीन के इन साजो-सामान पर पूरी तरह से निर्भर है। मंगलवार को युद्धाभ्यास के दौरान बाज ‘अर्जुन’ एक भारतीय के हाथ पर बैठा हुआ था। उसके पास ही एक ट्रेंड डॉग बैठा हुआ था। तभी एक ड्रोन को आसमान में उड़ाया जाता है। ड्रोन की आवाज सुनते ही ट्रेंड कुत्ते कमांडो ने ‘अर्जुन’ की तरफ देख कर भौंकना शुरू कर दिया। फिर पलक झपकते ही अर्जुन ने उड़ान भरी और दुश्मन के ड्रोन को अपने पंजों से मारकर गिरा दिया। भारतीय सेना के अधिकारियों ने बताया कि अर्जुन और सेना के ट्रेंड डॉग्स मिलकर अब बॉर्डर से सटे इलाके की निगरानी करेंगे। भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल सुधीर चमोली ने कहा कि एंटी ड्रोन सिस्टम की तरह इस बाज को ट्रेंड किया गया है। दरअसल, पिछले कुछ सालों से चीन और पाकिस्तान के ड्रोन को लगातार घुसपैठ करते देखा जा रहा है। इस वजह से 2020 में भारतीय सेना ने ‘एंटी ड्रोन सिस्टम’ की तरह से बाज और डॉग्स को ट्रेंड करना शुरू किया था। उन्होंने कहा कि एक बार डॉग स्मयड किसी ड्रोन की आवाज सुन ले तो फिर उस ड्रोन का बाज अर्जुन के पंजों से बचना नामुमकिन है। यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कई जगहों पर निगरानी के लिए बाज का इस्तेमाल किया गया है। इसके कुछ उदाहरण यहां हैं। 2020 में तेलंगाना सरकार ने वीवीआईपी यात्राओं के दौरान ड्रोन हमले को बेअसर करने के लिए ये गरुड़ दस्ता बनाया था। इस दस्ते को ट्रेंड करने की जिम्मेदारी इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस ट्रेनिंग एकेडमी यानी आईआईआईचटीए पर थी। इसके लिए डीजीपी के आदेश से 35,000 रुपए और 25,000 रुपए के मंथली वेतन पर दो ट्रेनर की भी नियुक्ति की गई थी। 2016 में नीदरलैंड की पुलिस ने ‘गार्ड फ्रॉम एबव’ नाम की एक कंपनी के साथ मिलकर एक चील दस्ते को ट्रेंड करना शुरू किया था। तब इस कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर ये दावा किया था कि पक्षियों को ट्रेंड करने वाली ये दुनिया की इकलौती कंपनी है। एनवाईटी ने डच पुलिस के सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया है कि कई मौकों पर दुश्मन देश के ड्रोन को पकड़ने में इन पक्षियों ने खास भूमिका निभाई थी। 2017 में फ्रांस की सेना ने नो-फ्लाई जोन में उड़ने वाले रिमोट कंट्रोल ड्रोन को नीचे उतारने के लिए 4 चील को प्रशिक्षित करना शुरू किया। फ्रांस एयरफोर्स के जनरल जीन-क्रिस्टोफ जिम्मरमैन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ये पक्षी हजारों मीटर दूर उड़ रहे ड्रोन के बारे में पता कर उसे बर्बाद करने में सक्षम थे। यही नहीं चील के सिर में लगे कैमरे के जरिए भीड़-भाड़ वाले इलाके की निगरानी करना भी आसान होता है। नीदरलैंड और फ्रांस सेना के नक्शेकदम पर स्कॉटलैंड पुलिस ने भी अपने यहां होने वाली तस्करी और आतंकी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए चील को ट्रेंड किया है। स्कॉटलैंड के मेट्रोपॉलिटिन पुलिस कमिश्नर सर बर्नाड होगन ने कहा था कि इंसानों के बिना ऑपरेट किए जाने वाले ड्रोन को गिराने में ये ट्रेंड पक्षी शानदार भूमिका निभाते हैं। द हिंदू ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि डेढ़ साल की ट्रेनिंग के बाद नीदरलैंड ने अपनी इन चीलों को रिटायर कर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि ये पक्षी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहे थे।