श्रीनगर : फारूक अब्दुल्ला सोमवार को फिर से एक और कार्यकाल के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) का अध्यक्ष निर्विरोध चुन लिये गए। महज एक पखवाड़े पहले 85 वर्षीय नेता ने एलान किया था कि वह अध्यक्ष पद के एक और कार्यकाल के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे। अब्दुल्ला करीब तीन दशक तक नेकां अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें सबसे पहले 1981 में नेकां अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने कहा कि वह इस्तीफा देना चाहते थे और युवा नेतृत्व को पार्टी की बागडोर सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें पद पर बने रहने के लिए राजी कर लिया गया, क्योंकि ‘हम बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। अब्दुल्ला को यहां नेकां के प्रतिनिधियों के सत्र में सर्वसम्मति से पार्टी का प्रमुख चुना गया। इससे पहले पार्टी के नेताओं ने नेकां संस्थापक शेख अब्दुल्ला की 117वीं जयंती के मौके पर हजरतबल में नसीमबाग स्थित उनके मकबरे पर उनके लिए दुआ की। इस घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख के तौर पर अब्दुल्ला का फिर से निर्वाचन यह दिखाता है कि पार्टी वंशवादी राजनीति तक सिमट कर रह गयी है ‘जिसकी जम्मू-कश्मीर में कोई जगह नहीं है।’ नेकां अध्यक्ष का पिछला चुनाव पांच साल पहले हुआ था। नेकां महासचिव अली मोहम्मद सागर ने कहा कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख तक केवल अब्दुल्ला का नामांकन दाखिल हुआ था। फारूक अब्दुल्ला के समर्थन में कश्मीर से कुल 183 प्रस्ताव, जम्मू से 396 और लद्दाख से 25 प्रस्ताव मिले थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री को सबसे पहले 1981 में नेकां अध्यक्ष चुना गया था जब उनके पिता शेख अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे। साल 2002 के विधानसभा चुनाव से पहले फारूक अब्दुल्ला के बेटे उमर को नेकां अध्यक्ष चुना गया था।