दुनिया के 8 देश ऐसे हैं जो पर्यावरण बचाने की अनूठी पहल कर चुके हैं। आइए जानते हैं वो आठ देश कौन से और क्या है पर्यावरण बचाने की उनकी मुहिम।
ब्रिटेन : ब्रिटेन ऐसा देश है जिसने पर्यावरण बचाने के लिए दुनिया में सबसे पहले कानून बनाया, ब्रिटेन और फ्रांस दुनिया के दो ऐसे देश हैं जिन्होंने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य पर लाने के लिए विशेष कानून बनाए हैं। ब्रिटेन में जून 2019 में कानून बनाकर यह काम 2050 तक करने का लक्ष्य तय किया ऐसा करने वाला ब्रिटेन पहला देश बना था।
फिनलैंड : फिनलैंड एक ऐसा देश है जिसमें पर्सनल कारें नहीं रखने का कानून बनाया है। फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी सबसे स्वच्छ राजधानी है। यहां 24 सौ मील साइकल लेन है। 2025 तक पर्सनल कार खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसकी जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम होगा, 1000 लोकल बस स्टॉप होंगे, टैक्सी की तरह बस पिकअप ड्रॉप सुविधा देगी ताकि पर्सनल कारों की जरूरत खत्म की जा सके।
स्वीडन : पूरे यूरोप महाद्वीप में सबसे कम उत्सर्जन दर स्वीडन की है 1990 के बाद से यहां उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कमी आई है या सरकार ने 2003 में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग नीति बनाई थी जिस पर अमल करते हुए अब यहां केवल 1 प्रतिशत ही ठोस कचरा बचता है। बाकी 99 प्रतिशत कचरे को रीसाइकल किया जाता है यहां उसकी बायोगैस बनती है। डेनमार्क : डेनमार्क में 41 प्रतिशत लोग साइकिलों से आवाजाही करते हैं। 2025 तक इसे 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
नॉर्वे : नॉर्वे की सरकार ने सबसे अलग ही पहल की है। नॉर्वे की सरकार चाहती है कि 2025 तक देश में 100 प्रतिशत इलेक्टि्रक कारें ही बिके ,नॉर्वे ने इलेक्टि्रक कारों को अपना लिया है । यहां 2017 तक बिकने वाली नई कारों में इलेक्ट्रॉनिक कारों और हाइब्रिड कारों की हिस्सेदारी आधी थी जो 2019 में बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई।
फ्रांस : फ्रांस में ज्यादा प्रदूषण करने वाली कारें जैसे एसयूवी पर टैक्स बढ़ा दिया है।
सिंगापुर : सिंगापुर ने दुनिया में सबसे अलग पहल की है। सिंगापुर की सरकार ने चाहा है हर इमारत ग्रीन टेक्नोलॉजी से बनेगी, सिंगापुर में 2008 में अनिवार्य किया गया था कि नई इमारतों को ग्रीन बिल्डिंग होगी। 2030 तक सभी 80 प्रतिशत इमारतों को ग्रीन करने का लक्ष्य है यानी इन इमारतों पर हरियाली ,सौर ऊर्जा ,वाटर रीचार्जिंग जैसी सुविधा होगी।
पेरू : पेरू देश ने पर्यावरण मामलों के लिए अलग कोर्ट बना दिया है। दक्षिण अमरीकी राष्ट्र ने 2018 में अलग पर्यावरण कोर्ट बनाई है अवैध खनन, वनों की कटाई, पर्यावरण क्षरण और वन्यजीवों की व्यापार की सुनवाई इस कोर्ट में होती है। पहले वर्ष ही कोर्ट में 3000 मामलों की सुनवाई हुई।