बढ़ते शहरीकरण और कटते पेड़ों के कारण पर्यावरण के साथ-साथ पक्षी और जानवर भी प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक कोई प्रभावित हुआ है तो वह गौरैया पक्षी है। बचपन में यह गौरैया हमें हर जगह नजर आती थी, लेकिन अब उसका चहचहाना जैसे बंद हो गया है। गौरैया अब हमारे आसपास कम नजर आती है, लेकिन पूर्वी दिल्ली में रहने वाले राकेश खत्री पर्यावरण संरक्षण के साथ इन गौरैया पक्षी को वापस लाने के लिए देशभर में इनका आशियाना बना रहे हैं। मयूर विहार फेस एक में रहने वाले 59 वर्षीय राकेश खत्री ने 2008 में पहली बार नारियल के शैल से घोंसला बनाया था, उनके घोंसले में एक बुलबुल आकर रहने लगी। इससे उन्हें हिम्मत मिली और उन्होंने जूट, प्लास्टिक वेस्ट, टैट्रा पैक्स के उपयोग से कृृत्रिम घोंसले बनाने शुरू किए। इससे पर्यावरण के प्रति भी उनका प्रेम बढ़ता गया और उन्होंने 2012 में इको रूट्स संस्था की स्थापना की। अब वह देशभर में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। राकेश खत्री स्कूलों में कार्यशाला का आयोजन कर विद्यार्थियों को कृृत्रिम घोंसले बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें गौरैया के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण की सीख भी दे रहे हैं। राकेश खत्री ने बताया कि उन्हें लोग नेस्ट मैन आफ इंडिया के नाम से भी जानते हैं। उन्हें कई पुरस्कार मिले हैं जिनमें उन्हें नेस्ट मैन आफ इंडिया लिखा जाता है।
स्कूली बच्चों को भी किया प्रेरित : राकेश खत्री ने बताया कि हाल में उन्होंने टैट्रा पैक के साथ मिलकर हैप्पी विंग्स कार्यक्रम शुरू किया है। इसके जरिए वह स्कूलों में कार्यशाला का आयोजन करके विद्यार्थियों को जूट, प्लास्टिक व टैट्रा पैक से कृृत्रिम घोंसले बनाने के साथ इन्हें अपने स्कूल, घर व पार्कों में लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इससे विद्यार्थी पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी हो रहे हैं। उनके इस कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर के 200 से अधिक स्कूलों तक पहुंचकर 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों को जैव विविधता की रक्षा के महत्व के बारे में शिक्षित करना है। साथ ही बच्चों को घरेलू कचरे जैसे जूट, नारियल की भूसी का उपयोग करके छोटे पक्षियों के लिए घोंसला बनाना सिखाना है। राकेश खत्री पेशे से एक डोक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता हैं, उन्होंने पर्यावरण पर कई डोक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाई हैं। राकेश खत्री को लंदन बुक आफ रिकार्ड द्वारा जूट और टैट्रा पैक्स से एक लाख 25 हजार आर्टिफिशियल घोंसले बनाने के लिए सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा कृृत्रिम घोंसले की सबसे अधिक कार्यशाला के लिए दो बार लिमका बुक आफ रिकार्ड में भी इनका नाम दर्ज हो चुका है। इन्हें इंटरनेशनल ग्रीन एप्पल अवार्ड भी मिला है। चौथी कक्षा आइसीएसई की अंग्रेजी की किताब में भी राकेश खत्री के कार्यों को समर्पित एक चैप्टर लिखा गया है। इसके अलावा फैब्यूलस 50 स्विट्जरलैंड की एक पुस्तक और गुजरात के स्कूलों में लगी 'भारत गौरव' पुस्तक में भी राकेश खत्री द्वारा पर्यावरण पर किए जा रहे कार्यों के बारे में लिखा गया है।