पर्यावरण संरक्षण के लिए मैसेज भेजने वाले, अपील करनेवाले लोग खूब मिलेंगे, लेकिन कुछ ही लोग होते हैं जो उसे अपने जीवन में उतार पाते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं सुरेंद्र अवाना, जो सुबह की शुरूआत पेड़ लगाकर करते हैं। पेड़ पौधों से ऐसा लगाव हुआ कि अब तक 9 सालों में 40 हजार से अधिक पेड़ पौधे लगा चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक आप अपने आप को पर्यावरण से अटैच नहीं करोगे, तक तक आपको इनकी महत्ता समझ में नहीं आएगी। अब तक आखिरी श्वास तक पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा है।

25 कॉलोनियों में लगा दिए 10 हजार से ज्यादा पौधेः अजमेर रोड स्थित गजसिंहपुरा में आप जाएंगे और कॉलोनियों में घूमेंगे तो आपको जगह-जगह घरों के बाहर पौधे नजर आएंगे। कच्ची गलियां, गांव में इस तरह पौधे देखकर आप सोचेंगे कि यहां लोगों में पेड़ पौधों को लेकर अवेयरनेस है।  कॉलोनियों में लोगों को पेड़ पौधे लगाने और लोगों को जागरूक करने का काम किया। गजसिंहपुरा के ही रहने वाले सुरेंद्र अवाना ने, जिनकी पहल से गजसिंहपुरा की 25 कॉलोनियों में 10 हजार से ज्यादा पौधे लग गए। सुरेंद्र अवाना ने बताया कि पहले बारिश के मौसम में पेड़ पौधे लगाते थे। 1 जुलाई 2010 से रोजाना एक पेड़ लगाने की शुरूआत की।  हालांकि यह एक चैलेजिंग था, लेकिन जब पेड़ पौधों के बारे में गहराई से अध्ययन किया और इनके उपयोग को समझा तो मैंने इन्हें रोजाना लगाने की ठानी और इसे जारी रख रहा हूं। 9 साल पहले के लगाए हुए पेड़ों को आज देखता हूं तो खुशी होती है। घर के आसपास लगाने के साथ ही गजसिंहपुरा गांव की 25 कॉलोनियों के साथ ही पार्क और श्मशान घाट पर पौधे लगाने का काम किया। अवाना बताते हैं कि लोगों के घरों के सामने पौधे लगाता हूं तो मकान मालिक को उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी सौंपता हूं। पार्क, श्मशान घाट पर खुद पानी की टैंकर से उन्हें पानी पहुंचाता हूं।

छायादार पौधों को प्राथमिकताः अवाना कहते हैं कि छायादार पौधे लगाने को वो प्राथमिकता देते हैं। जिसमें नीम, करंज, गूलर, सेंजना, शहतूत, बरगद, पीपल पेड़ पौधों के लिए नर्सरी भी लगा रखी है। वो कहते हैं कि पेड़ पौधे लगाते लगाते अब तो इतना अनुभव हो गया है कि दूर से ही पेड़ पौधे की ग्रोथ देखकर बता देते हैं कि इसमें खाद की कमीं है या पानी की। स्थानीय कॉलोनी वासी संजीव चौधरी, महेश शर्मा बताते हैं कि इन कॉलोनियों में लगे सारे पौधे इनकी देन हैं। अब तो इनको देखकर अन्य लोग भी मोटिवेट होने लगे हैं।  कॉलोनी के लोग भी अब तो इन्हें पेड़ वाले गुरूजी के नाम से पुकारते हैं। यह कॉलोनियों में भी घूमते हैं और पेड़ पौधों की देखभाल को लेकर लोगों को टोकते रहते हैं।