इटानगर : 9 दिसंबर 2022। अरुणाचल प्रदेश के तवांग का यंगस्टे। एलएसी पर चीनी सैनिकों ने एक बार फिर भारत में घुसने की कोशिश की। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताकर अपना दावा पेश करता रहा है। चीन ने पिछले साल ही अरुणाचल प्रदेश के 15 इलाकों के नाम बदल दिए थे यानी चीन के जमीन हथियाने की नीति का अगला फोकस भारत है। रूस और कनाडा के बाद चीन सबसे बड़ा देश है। इसका कुल एरिया 97 लाख 6 हजार 961 वर्ग किलोमीटर है।इसमें से 43प्रति. जमीन दूसरों से हड़पी हुई है। चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान पर 1949 में कब्जा किया था, चीन इसे शिनजियांग प्रांत बताता है। इसका कुल एरिया ईरान जितने बड़े देश के बराबर है। यहां की कुल आबादी में 45प्रति. उइगर मुस्लिम हैं, जबकि 40प्रति. हान चीनी हैं। उइगर मुस्लिम तुर्किक मूल के माने जाते हैं। चीन ने शिनजियांग को स्वायत्त क्षेत्र घोषित कर रखा है। 23 मई 1950 को चीन के हजारों सैनिकों ने तिब्बत पर हमला कर दिया और उस पर कब्जा कर लिया। पूर्वी तुर्किस्तान के बाद तिब्बत, चीन का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है। इसका कुल एरिया दक्षिण अफ्रीका जैसे देश जितना बड़ा है। यहां की आबादी में 78प्रति. बौद्ध हैं। 1959 में चीन ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को बिना बॉडीगार्ड के बीजिंग आने का न्योता दिया था, लेकिन उनके समर्थकों ने उन्हें घेर लिया था ताकि चीन गिरफ्तार न कर सके। बाद में दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी। 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध के पीछे ये भी एक कारण था। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद चीन ने इनर मंगोलिया पर कब्जा कर लिया था। 1947 में चीन ने इसे स्वायत्त घोषित किया। एरिया के हिसाब से इनर मंगोलिया, चीन का तीसरा सबसे बड़ा सब-डिविजन है। इसका क्षेत्रफल कोलंबिया जितने बड़े देश के बराबर है। हॉन्गकॉन्ग पहले चीन का ही हिस्सा था, लेकिन 1842 में ब्रिटिशों के साथ हुए युद्ध में चीन को इसे गंवाना पड़ा। 1997 में ब्रिटेन ने चीन को हांगकांग लौटा दिया, लेकिन इसके साथ वन कंट्री, टू सिस्टम समझौता भी हुआ, जिसके तहत चीन हांगकांग को अगले 50 साल तक राजनीतिक तौर पर आजादी देने के लिए राजी हुआ। हांगकांग के लोगों को विशेष अधिकार मिले हैं, जो चीन के लोगों को नहीं हैं। 1911 में चीन में कॉमिंगतांग की सरकार बनी। 1949 में यहां गृहयुद्ध छिड़ गया और माओ त्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने कॉमिंगतांग की पार्टी को हराया। हार के बाद कॉमिंगतांग ताइवान चले गए। 1949 में चीन का नाम पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना पड़ा और ताइवान का रिपब्लिक ऑफ चाइना पड़ा। दोनों देश एक-दूसरे को मान्यता नहीं देते। लेकिन, चीन दावा करता है कि ताइवान भी उसका ही हिस्सा है। 11 मार्च 2020 को लोकसभा में दिए जवाब में उस वक्त के विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने बताया था कि लद्दाख का करीब 38 हजार स्मयर किमी का हिस्सा चीन के कब्जे में है। इसके अलावा 2 मार्च 1963 को चीन-पाकिस्तान के बीच हुए एक समझौते के तहत पाकिस्तान ने पीओके का 5 हजार 180 स्मयर किमी चीन को दे दिया था। अभी जितने भारतीय हिस्से पर चीन का कब्जा है, उतना एरिया स्विट्जरलैंड का भी नहीं है। कुल मिलाकर चीन ने भारत के 43 हजार 180 स्मयर किमी पर कब्जा जमा रखा है, जबकि स्विट्जरलैंड का एरिया 41 हजार 285 स्मयर किमी है। इसके अलावा चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार स्मयर किमी के हिस्से पर अपनी दावेदारी करता है। 1949 में कम्युनिस्ट सरकार बनने के बाद से ही चीन दूसरे देशों इलाकों पर कब्जा जमाता रहता है। चीन की सीमाएं 14 देशों से लगती है, लेकिन एक रिपोर्ट बताती है कि चीन 23 देशों के इलाकों को अपना हिस्सा बताता है। चीन दक्षिणी चीन सागर पर भी अपना हक जताता है। इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला यह सागर 35 लाख स्मयर किमी में फैला हुआ है। यह सागर इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताइवान और ब्रूंनेई से घिरा है। लेकिन, सागर पर इंडोनेशिया को छोड़कर बाकी सभी 6 देश अपना दावा करते हैं। आज से कुछ सालों पहले तक इस सागर को लेकर कोई तनातनी नहीं होती थी। लेकिन, आज से करीब 5 साल पहले चीन के समंदर में खुदाई करने वाले जहाज, ईंट और रेत लेकर दक्षिणी चीन सागर पहुंचे। पहले यहां एक छोटी समुद्री पट्टी पर बंदरगाह बनाया गया। फिर हवाई जहाजों के उतरने के लिए हवाई पट्टी। और फिर देखते ही देखते चीन ने यहां आर्टिफिशियल द्वीप ही तैयार कर सैन्य अड्डा बना दिया। चीन के इस काम पर जब सवाल उठे, तो उसने दावा किया कि दक्षिणी चीन सागर से उसका ताल्लुक 2 हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। इस सागर पर पहले जापान का कब्जा हुआ करता था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के तुरंत बाद चीन ने इस पर अपना हक जता दिया।
चीन की 43 प्रतिशत जमीन दूसरों से हड़पी हुई