श्रीनगर : पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) अगर जम्मू कश्मीर में सत्ता में आती है तो वह पहले ही दिन विवादास्पद जन सुरक्षा कानून (पीएसए) निरस्त कर देगी। नेकां संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की अगुवाई वाली सरकार ने 1978 में लकड़ी की तस्करी रोकने के लिए जन सुरक्षा कानून लागू किया था। बिना मुकदमा चलाए दो साल तक हिरासत में रखने के प्रावधान वाले इस कानून का इस्तेमाल 1990 के बाद आतंकवादियों और अलगाववादियों के खिलाफ किया गया। उमर ने अनंतनाग जिले के डूरू में पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्होंने (केंद्र ने) केवल वही (पुराने) कानून को यहां बनाये रखा, जिसका इस्तेमाल लोगों के उत्पीड़न में किया जा सकता हो। देश में कहीं भी जन सुरक्षा कानून नहीं है...केवल जम्मू कश्मीर में यह कानून है। मैंने पहले भी कहा है और दोबारा कह रहा हूं जब नेशनल कांफ्रेंस की सरकार आएगी तो पहले ही दिन इस कानून को निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करना जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में एक मुद्दा होगा। उन्होंने कहा कि यह जाहिर है कि यह चुनाव महज बिजली, सड़क, पानी के मुद्दे पर नहीं लड़ा जाएगा। पांच अगस्त 2019 के बाद से जो कुछ भी हुआ है, वह चुनावों में एक मुद्दा होगा। देखते हैं कि लोगों का फैसला क्या होता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान और हितों की रक्षा के लिए सभी कदम उठाएगी। उन्होंने केंद्र पर जम्मू-कश्मीर में बाहरी लोगों को लाकर स्थानीय लोगों के संसाधन तथा नौकरियां छीनने का आरोप लगाया। उमर ने दावा किया,‘खनिजों के खनन के ठेके बाहरी लोगों को दिए गए। यहां तक कि पत्र पहुंचाने वाले डाकिए भी दूसरे स्थानों से लाये जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर में नेकां की सरकार बनने पर निरस्त करेंगे पीएसए : उमर