गुवाहाटी : असम की सुसंतान और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. बीरेंद्र सराफ को महाराष्ट्र का अगला एडवोकेट जनरल (एजी) बनाया गया है। राज्य सरकार के अनुमोदन पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें नया एडवोकेट जनरल नियुक्त किया। डॉ. सराफ के नाम पर राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ही अपनी बैठक मुहर लगा दी। डॉ. सराफ को इस पद पर  वर्तमान महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी के इस्तीफे के बाद नियुक्त किया गया। फरवरी 2020 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित डॉ. सराफ लगभग 25 वर्षों से बॉम्बे उच्च न्यायालय में प्रैटिक्स कर रहे हैं। उनका गुवाहाटी से गहरा रिश्ता है। उन्होंने गौहाटी कॉमर्स कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स की परीक्षा उत्तीर्ण की और प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान पर रहे।  वह स्वर्गीय न्यायमूर्ति डॉ.बीपी सराफ के छोटे बेटे हैं, जो जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे और गौहाटी हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कर मामलों के जानकार डॉ.अशोक सराफ के छोटे भाई हैं। उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से अपना एलएलबी  फर्स्टक्लास फस्ट श्रेणी पूरा किया और बाद में भारत में मध्यस्थता में न्यायिक हस्तक्षेप  विषय पर पीएचडी की। सराफ टाउन प्लानिंग, रिट याचिकाओं, दीवानी विवादों, वैकल्पिक विवाद निवारण, वाणिज्यिक मामलों और बौद्धिक संपदा मुकदमों से संबंधित मामलों में प्रैक्टिस करते आ रहे हैं। वह सार्वजनिक महत्व के कई मामलों और उच्च हिस्सेदारी वाले मध्यस्थता,सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और वैधानिक निकायों में पेश हुए और उन्होंने मध्यस्थ,  और सुलहकर्ता के रूप में भी काम किया। उन्होंने बॉम्बे बार एसोसिएशन के मानद सचिव के रूप में भी काम किया। वे बॉम्बे हाईकोर्ट में प्रैटिक्स करने वाले वकीलों के सबसे पुराने संघ के वर्तमान में  उपाध्यक्ष हैं। बताते चलें कि डॉ. सराफ पूर्व में  भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कक्ष (चैंबर) का भी हिस्सा रह चुके हैं। हाल ही में उनके सामने कुछ हाई प्रोफाइल मामले भी आए। वह अभिनेत्री कंगना रनौत के लिए पेश हुए, जिन्होंने पिछले साल बृहन्मुंबई नगर निगम की ओर से जारी एक आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें उनके बांद्रा कार्यालय में किए गए कथित बदलावों को ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने नगर निकाय के फैसले को रद्द कर दिया था। सराफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व जोनल निदेशक समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े के लिए भी पेश हुए, जिन्होंने एनसीपी नेता नवाब मलिक की ओर से वानखेड़े परिवार के खिलाफ दिए गए बयानों के खिलाफ उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। वह अपनी मानहानि याचिका में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के लिए भी पेश हुए थे, जिसमें विभिन्न मीडिया संगठनों को एडल्ट फिल्मों के मामले में उनके पति राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के संबंध में सोशल मीडिया और वेबसाइटों पर उनके खिलाफ किसी भी अपमानजनक सामग्री को प्रकाशित करने से रोकने की मांग की गई थी। डॉ. सराफ ने स्कूल फीस कानून को सख्ती से लागू करने की मांग करने वाली अपनी जनहित याचिका में कांदिवली (पूर्व) से भाजपा विधायक अतुल भातखलकर और अन्य का भी प्रतिनिधित्व किया। वह बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली के लिए एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण के एक आदेश को लागू करने की मांग वाली अपनी याचिका पर बहस कर रहे थे, जिसने उन्हें उनकी पूर्व प्रबंधन कंपनियों द्वारा भुगतान किए जाने वाले 35 करोड़ रुपये से अधिक के मुआवजे का आदेश दिया था।