पूर्वांचल प्रहरी डेस्क संवाददाता

गुवाहाटी : मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्वशर्मा ने मंगलवार को औपचारिक रूप से राज्य के 6,124 नामघरिया और 2,148 पुरोहितों (पुजारियों) को  10,000 रुपए की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की। इस पहल के लाभार्थियों की बड़ी संख्या के कारण  जनता भवन में 10 पुरोहितों और 10 नामघरिया को प्रतीकात्मक रूप से 10,000 रुपए के चेक सौंपे गए। शेष हितकारियों को उनके संबंधित खातों में बैंक हस्तांतरण के माध्यम से राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि सरकार ने यह पहल पुजारियों और नामघरिया को कोविड महामारी के दौरान हुई कठिनाइयों के कारण की है। इस दौरान राज्य की आबादी के बीच खतरनाक वायरस के प्रसार को रोकने के लिए मंदिरों और मठों को बंद कर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि नव-वैष्णव मठ और मंदिर न केवल असम के लोगों के दैनिक जीवन में आध्यात्मिक और धार्मिक भूमिका निभाते हैं, बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखते हैं। दुर्गा पूजा के दौरान ओजापाली के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असम में धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक अनुष्ठानों के बीच अंतर की बहुत पतली रेखा थी। उन्होंने कहा कि असमिया संस्कृति और पहचान नाम- कीर्तन के बिना अधूरी है, हालांकि सैद्धांतिक रूप से यह एक धार्मिक अनुष्ठान हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 जनवरी, 2023 को प्रतिमा पाण्डेय बरुवा के आवास को उनके परिवार के सदस्यों से एक विरासत संरचना के रूप में संरक्षित करने की जिम्मेदारी सरकार औपचारिक रूप से स्वीकार करेगी। इस कार्यक्रम में असम कैबिनेट के मंत्रियों विमल बोरा, जोगेन मोहन और रंजीत कुमार दास ने भाग लिया।